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क्या विपक्ष की आवाज़ दबाई जा रही है? संसद के बाहर SIR के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन

संसद में SIR को लेकर विपक्ष का जबरदस्त विरोध: सरकार क्यों कर रही है पीछे हटने की कोशिश?- मंगलवार को संसद परिसर में विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जो पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई बड़े विपक्षी नेता ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) के खिलाफ एकजुट होकर खड़े दिखे। उनका आरोप है कि SIR के जरिए निर्वाचन सूची में गड़बड़ी की जा रही है और वे इस मुद्दे पर संसद में खुलकर चर्चा चाहते हैं। संसद के मकर द्वार के सामने नेताओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। एक बड़ा बैनर था जिस पर लिखा था—‘Stop SIR – Stop Vote Chori’। यह साफ संकेत था कि विपक्ष इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके की कनिमोझी, टी. आर. बालू समेत कई अन्य विपक्षी नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल थे। उनका कहना है कि चुनावी सूचियों की पारदर्शिता लोकतंत्र की नींव है और सरकार को इस पर बहस से नहीं बचना चाहिए। यह विरोध केवल तकनीकी प्रक्रिया का सवाल नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है जो आने वाले चुनावों को भी प्रभावित कर सकता है।

संसद का पहला दिन हंगामेदार: SIR पर चर्चा को लेकर टकराव- संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं राज्यसभा में विपक्ष ने SIR पर चर्चा की मांग को लेकर सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष लगातार कह रहा है कि चुनाव सुधारों पर चर्चा टालना लोकतंत्र के हित में नहीं है।
सरकार ने कहा कि वह चर्चा के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह तय समय पर ही होगी और उस पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। विपक्ष इसे सरकार की रणनीति मान रहा है और आरोप लगा रहा है कि सरकार बहस से बच रही है। संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होने से साफ हो गया कि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति से नहीं हटेंगे। जहां विपक्ष चुनावी सूचियों में पारदर्शिता की बात कर रहा है, वहीं सरकार अपनी प्रक्रिया और समय-सारणी पर अड़ी हुई है। पहले दिन का यह हंगामा संकेत देता है कि शीतकालीन सत्र में यह विवाद और भी गर्म बहसों को जन्म देगा।

पीएम मोदी का तंज: क्या विपक्ष संसद को ‘इलेक्शन वॉर्म-अप ज़ोन’ बना चुका है?- सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संसद को चुनाव की तैयारी और अपनी निराशा निकालने की जगह बना लिया है। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस जरूरी है, लेकिन विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चाहे तो वे उन्हें राजनीति में सकारात्मकता लाने के सुझाव भी दे सकते हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान साफ करता है कि सरकार विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना मानती है। विपक्ष का कहना है कि उनकी मांग जायज़ है और वे केवल उन मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं जो सीधे जनता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हैं। SIR को लेकर उठ रही चिंताओं को नजरअंदाज करना लोकतंत्र की बुनियादी भावना के खिलाफ है। प्रधानमंत्री और विपक्ष के बीच यह जुबानी टकराव बताता है कि आने वाले दिनों में बहस और तेज होगी क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अडिग हैं।

यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि SIR को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है और संसद में इस मुद्दे पर बहस अभी लंबी चलने वाली है। जनता की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और लोकतंत्र की रक्षा कैसे करते हैं।

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