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मोदी के फैसले से बदला नेतृत्व: कैसे माणिक साहा बने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री

प्रधानमंत्री के फैसले से बना त्रिपुरा का नया मुख्यमंत्री: माणिक साहा की पूरी कहानी- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने खुलकर बताया कि मार्च 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया था। साहा ने कहा कि उन्होंने बिना किसी सवाल के यह जिम्मेदारी स्वीकार की, हालांकि उनके परिवार को शुरुआत में यकीन नहीं हुआ था। इस बदलाव के पीछे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका साफ नजर आती है।

बीजेपी में मुख्यमंत्री तय करने की परंपरा- माणिक साहा ने मोहनपुर में पार्टी कार्यक्रम के दौरान कहा कि बीजेपी में मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला केवल प्रधानमंत्री करते हैं। पार्टी के अन्य नेताओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। साहा के इस बयान से उन अफवाहों का खंडन हुआ, जिनमें उनके और पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के बीच मतभेद की बातें कही जा रही थीं।

अचानक हुआ नेतृत्व परिवर्तन- साहा ने याद किया कि 13 मार्च 2022 को बिप्लब कुमार देब ने उन्हें फोन कर बताया कि बड़ा फैसला होने वाला है। अगले दिन देब ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने देब ने साहा का नाम प्रस्तावित किया। यह बदलाव त्रिपुरा की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हुआ।

परिवार भी था हैरान, लेकिन भरोसा जताया- साहा ने बताया कि मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबर जब टीवी पर आई, तो उनके परिवार वाले भी हैरान रह गए। शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं हुआ कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी उन्हें मिली है। लेकिन उन्होंने पार्टी और प्रधानमंत्री के फैसले पर भरोसा जताया और पूरी लगन से काम करना शुरू किया।

बिप्लब देब की भूमिका को किया सम्मानित- साहा ने बिप्लब कुमार देब की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2018 में त्रिपुरा में पहली बार बीजेपी की सरकार बनाने में देब की अहम भूमिका थी। साथ ही, 2016 में देब ने उन्हें पार्टी में शामिल किया और विभिन्न जिम्मेदारियां दीं, जिससे साहा का राजनीतिक सफर मजबूत हुआ।

रिश्तों पर साफ-सुथरा बयान- साहा ने कहा कि वे डॉक्टर हैं, अभिनेता नहीं, मतलब उनके और देब के बीच कोई दिखावटी रिश्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि बीजेपी में आने के बाद से ही दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं और आज भी आपसी सम्मान कायम है। यह साफ करता है कि उनके रिश्ते में कोई खटास नहीं है।

संगठन निर्माण में बिप्लब देब की ताकत- साहा ने बताया कि बिप्लब देब संगठन बनाने में माहिर नेता हैं। इसलिए पार्टी ने उन्हें 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का ‘सह-प्रभारी’ बनाया है। साहा का मानना है कि देब का अनुभव पार्टी के लिए आने वाले चुनावों में बहुत काम आएगा।

मंच पर दिखी एकजुटता और भरोसा- अपने भाषण के बाद माणिक साहा और बिप्लब कुमार देब के बीच मंच पर जो नजारा दिखा, उसने साफ कर दिया कि दोनों नेताओं के बीच कोई दूरी नहीं है। देब ने साहा को गले लगाया, जो पार्टी की एकता और नेतृत्व के बीच मजबूत भरोसे का प्रतीक है। यह तस्वीर बीजेपी की मजबूती को दर्शाती है।

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