बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग अधूरी क्यों? सियासत के बीच उठे बड़े सवाल

पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा पर सवाल: फेंसिंग अधूरी, सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित-पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा की फेंसिंग को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की अनिच्छा और सहयोग न करने की वजह से सीमा सुरक्षा कमजोर हो रही है। इस मुद्दे पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जो राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकी दोनों को प्रभावित कर रहे हैं।
सीमा फेंसिंग अधूरी, ममता सरकार पर सहयोग न करने का आरोप-सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल में सीमा की फेंसिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि सीमा पर फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन राज्य सरकार को देनी होती है, लेकिन इसमें लगातार देरी हो रही है। अधिकारी का मानना है कि ममता बनर्जी सरकार जानबूझकर इस प्रक्रिया में बाधा डाल रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है।
अवैध घुसपैठ से जनसांख्यिकीय बदलाव का खतरा-नेता प्रतिपक्ष ने बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे पश्चिम बंगाल में जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है और कुछ इलाकों में हिंदू त्योहारों के आयोजन में भी दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो इस समस्या को गंभीरता से सुलझाया जाएगा।
अन्य राज्यों में फेंसिंग पूरी, बंगाल में अधूरी क्यों?-सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा, असम और मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा की फेंसिंग 100% पूरी हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह काम अधूरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में यह संभव है, तो बंगाल में क्यों नहीं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की अनिच्छा इस देरी की सबसे बड़ी वजह है।
बीएसएफ पर हमलों का आरोप, सुरक्षा बलों का मनोबल टूटा-अधिकारी ने कहा कि जब भी सीमा सुरक्षा या अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठता है, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता बीएसएफ पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लोगों को बीएसएफ के खिलाफ उकसाया गया और हमले तक किए गए, जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा है और काम में बाधा आई है।
जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी राज्य सरकार की-सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सीमा पर कंटीली तार लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराना पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन अधिग्रहित कर उसे बीएसएफ को सौंपना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर इस प्रक्रिया को रोक रही है, जबकि केंद्र सरकार बार-बार इसे पूरा करने की बात कह चुकी है।
हाईकोर्ट का आदेश भी राज्य सरकार के लिए चुनौती-अधिकारी ने बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार 31 मार्च तक उन जमीनों को बीएसएफ को सौंपे, जिनका अधिग्रहण हो चुका है और जिनका मुआवजा केंद्र सरकार से मिल चुका है। ये जमीनें नौ सीमावर्ती जिलों में हैं, जहां फेंसिंग का काम लंबे समय से रुका हुआ है।
अवैध घुसपैठ रोकने में राज्य सरकार की लापरवाही-सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जमीन न सौंपने की वजह से बांग्लादेशी मुस्लिमों और रोहिंग्याओं की अवैध घुसपैठ नहीं रुक पा रही है। उनका मानना है कि इससे न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने इसे राज्य सरकार की गंभीर लापरवाही बताया।
अमित शाह के बयान का हवाला, बीजेपी सरकार पर भरोसा-अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि बंगाल में हो रही अवैध घुसपैठ पूरे देश के लिए खतरा है। अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि बीजेपी सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर सीमा फेंसिंग पूरी कर दी जाएगी, जिससे सुरक्षा मजबूत होगी।
लंबी सीमा और बढ़ती चुनौतियां-भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 4096.70 किलोमीटर है, जिसमें से 2216.70 किलोमीटर पश्चिम बंगाल में है। इतनी लंबी सीमा होने के बावजूद फेंसिंग अधूरी रहना चिंता का विषय है, क्योंकि इससे नशे, घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों में वृद्धि हो रही है।
सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर-पश्चिम बंगाल के नौ जिलों—उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार—में जमीन न मिलने की वजह से बीएसएफ को काम करने में दिक्कत हो रही है। इससे सीमा सुरक्षा कमजोर पड़ रही है और खतरा बढ़ रहा है।पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल और आरोप राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। फेंसिंग अधूरी रहना और अवैध घुसपैठ की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। राजनीतिक विवाद के बीच जरूरी है कि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और सीमा पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि राज्य और देश दोनों सुरक्षित रह सकें।



