बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीण: NH-130C पर चक्काजाम से थमा यातायात

हाईवे पर उतरी गांव की आवाज: सुविधाओं की कमी ने तोड़ा सब्र- ग्रामीणों का धैर्य हुआ खत्म, सड़क पर किया प्रदर्शन
गरियाबंद जिले के उदंती-सीता नदी अभ्यारण्य के कोर जोन में बसे साहेबीन कछार गांव के लोगों का लंबे समय से अधूरी पड़ी बुनियादी जरूरतों ने उनका सब्र जवाब दे दिया। शिक्षक, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की कमी से परेशान ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह नेशनल हाईवे-130C पर पहुंचकर चक्काजाम कर दिया। इससे हाईवे पर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं और आवाजाही ठप हो गई।
ग्राम नेतृत्व में आंदोलन, पुलिस ने समझाने की कोशिश की- इस आंदोलन की अगुवाई ग्राम प्रमुख अर्जुन नायक और रूपसिंह मरकाम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन के पास अपनी समस्याएं लेकर गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। मौके पर पहुंची इंदागांव पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे सड़क से हटेंगे नहीं।
सड़क निर्माण से लेकर शिक्षा तक, 8 सूत्रीय मांगें- ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग बम्हनीझोला से उड़ीसा सीमा तक 25 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण है। इसके अलावा, इंदागांव स्थानांतरित आदिवासी कन्या छात्रावास और कन्या शाला को साहेबीन कछार में वापस लाने और नए भवन बनाने की भी मांग की गई है। बिजली, स्कूल भवनों की मरम्मत और शिक्षकों की उपलब्धता भी उनकी सूची में शामिल है।
शिक्षा और संचार सुविधाओं पर खास जोर- ग्रामीणों का कहना है कि साहेबीन कछार की माध्यमिक शाला में नियुक्त शिक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, गांव में लगा जियो टॉवर अब तक चालू नहीं हुआ है, जिससे मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। शिक्षा और संचार के बिना विकास की कल्पना करना मुश्किल है, इसलिए ये मांगें आंदोलन का मुख्य हिस्सा हैं।
स्वास्थ्य और जल व्यवस्था की बदहाली भी बड़ी समस्या- आंदोलन कर रहे लोगों ने उप-स्वास्थ्य केंद्र करलाझर में बिजली और नलजल सुविधा चालू करने की मांग की है। साथ ही अधूरी पड़ी नल-जल योजना को फिर से शुरू करने पर जोर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार होने पर इलाज के लिए उन्हें दूर जाना पड़ता है और पानी की समस्या ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत कठिन बना दिया है।
तीन साल से मिल रहा सिर्फ आश्वासन, अब आर-पार की लड़ाई-ग्रामीणों ने बताया कि 28 अक्टूबर को उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी 8 सूत्रीय मांगें रखी थीं। पिछले तीन सालों में वे हर उस मंच पर अपनी बात रख चुके हैं, जहां से उम्मीद थी, लेकिन हर बार केवल भरोसा दिलाया गया। ग्राम प्रमुख अर्जुन नायक का कहना है कि अब लोग थक चुके हैं और इस बार बिना मांगें पूरी हुए पीछे हटने वाले नहीं हैं।



