Google Analytics Meta Pixel
Madhya Pradesh

आधुनिक और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान का अनूठा संगम है गीता भवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल :  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों में धार्मिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक चेतना के माध्यम से सामाजिक समरसता स्थापित करने प्रदेश में “गीता भवन” बनाये जा रहे हैं। यह केन्द्र मात्र एक भवन की संरचना नहीं, बल्कि एक जीवंत वैचारिक अध्ययन का केन्द्र है। इनमें आधुनिकता और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के अनूठे संगम में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने प्रदेश के हर नगरीय निकाय में गीता भवन स्थापित करने का जो संकल्प लिया है, वह तेजी से पूर्ण हो रहा है। यह गर्व का विषय है कि प्रदेश के पहले गीता भवन का शुभारंभ लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी इन्दौर में और दूसरा गीता भवन वीरांगना रानी दुर्गावती की कर्मभूमि जबलपुर में शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी राष्ट्र, कोई भी संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़कर ही पुष्पित-पल्लवित होती है। गीता भवन संस्कृति को सहेजने और संवर्धित करने का बड़ा माध्यम बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता भवन राज्य की उस बड़ी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, गीता-ज्ञान और पठन-संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ना है। गीता भवन एक आधुनिक मंच है, जहाँ अध्ययन, चिंतन, शोध और सांस्कृतिक विमर्श के माध्यम से भारतीय दृष्टि को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाएगा। ये भवन अध्ययन, चिंतन और संवाद का जीवंत केंद्र बनेंगे।

गीता भवन में सुविधाएँ गीता भवन में धार्मिक, पौराणिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने वाली, साहित्यिक, प्रेरणादायी जीवनियां, और प्रतियोगी परीक्षाओं आदि की विविध पुस्तकें उपलब्ध हैं। यहाँ वातानुकूलित ई-लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दी, अंग्रेजी एवं संस्कृत में पुस्तकें उपलब्ध हैं। पाठकों की सुविधा के लिए रामायण कक्ष, गीता कक्ष और सर्वधर्म पुस्तक कक्ष भी बनाए गए हैं। गीता भवन में अध्ययन के लिए आने वाले लोगों के लिये सभी सुविधाओं सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु खूबसूरत सभागृह भी है।

श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से कान्हा की लीलाओं और ज्ञान का प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृष्ण को योगेश्वर श्रीकृष्ण की पहचान देने वाले चारों धामों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन, भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा का मैत्री स्थल स्वर्णगिरी पर्वत के पास ग्राम नारायाणा, धार जिले का अमझेरा और रजोभूमि बदनावर जहां भगवान श्रीकृष्ण ने रात्रि विश्राम किया था। साथ ही इंदौर के पास जानापाव जहां से उन्होंने विनम्रता का संदेश दिया था। इन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगे। पाथेय के मार्ग में पड़ने वाले जल, वन और उद्यानों का संरक्षण किया जाएगा। हम पुरातात्विक सर्वेक्षण के माध्यम से उन स्थानों को भी खोजेंगे, जहां से भगवान श्रीकृष्ण का संबंध हो सकता है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button