दूषित पानी पर राजनीति, धरने की जगह नाश्ता: भागीरथपुरा मामले में कांग्रेस का प्रदर्शन सवालों में

इंदौर में प्रदर्शनों का सन्नाटा: कांग्रेस का बड़ा ऐलान रह गया खाली शब्द-इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विधायकों के घर घेरने का बड़ा ऐलान किया था। लेकिन जब वक्त आया, तो यह ऐलान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया। भाजपा विधायक रमेश मेंदोला के घर पर न तो कोई भीड़ दिखी, न नारे, न कोई गुस्सा नजर आया।
प्रदर्शन की जगह मिली चाय-नाश्ते की मेजबानी-विधायक मेंदोला के घर कांग्रेस की ओर से सिर्फ एक कार्यकर्ता पहुंचा था। वह न तो नारे लगाने आया था, न विरोध जताने। भाजपा नेताओं और विधायक के भतीजे ने उसे बैठाकर बातचीत की और चाय-नाश्ता कराया। कार्यकर्ता मुस्कुराते हुए वहां से चला गया, जिससे इस ‘प्रदर्शन’ की गंभीरता पर सवाल उठने लगे।
खुद कार्यकर्ता ने बताया सच-अकेले आए इस कार्यकर्ता ने खुद माना कि वह सूचना के आधार पर आया था, लेकिन बाद में पता चला कि प्रदर्शन पहले ही रद्द हो चुका है। पुलिस ने संभावित हंगामे से बचने के लिए विधायक के घर के बाहर बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन माहौल पूरी तरह शांत रहा।
सियासी गलियारों में उड़ी तंज की बातें-कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने भी माना कि प्रदर्शन में भारी कमी रही। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि “बीजेपी और कांग्रेस मिलकर पार्टी मना रहे हैं।” यह नजारा कांग्रेस संगठन की तैयारी और गंभीरता की कमी को साफ दिखाता है।
पीड़ितों से मिलने गए नेता, फिर हुआ हंगामा-भागीरथपुरा में मृतकों के परिवार से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं को भाजपा कार्यकर्ताओं ने रोक दिया। दोनों पक्षों में नारेबाजी हुई, लेकिन इसी बीच भाजपा मंडल अध्यक्ष चंदन सिंह बेस और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे गले मिलते नजर आए। यह तस्वीर विरोध की असलियत को उजागर करती है।
न इंसाफ, न जवाबदेही: जनता के दर्द से खेला सियासी ड्रामा-अंत में पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटा दिया। न तो पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिला, न किसी की जवाबदेही तय हुई। भागीरथपुरा जैसे गंभीर मामले पर यह पूरा घटनाक्रम जनता के दर्द से ज्यादा सियासी ड्रामे की झलक दिखाता है।



