Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश सरकार की बड़ी मांग: सिंहस्थ 2028 के लिए 20,000 करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज

मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 को सफल और भव्य बनाने के लिए केंद्र सरकार से 20,000 करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। यह मांग हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में रखी गई। सरकार का मानना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के लिए सामान्य बजट पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर सड़कें, मजबूत पुल, आधुनिक घाट और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र का सहयोग बेहद जरूरी है ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।

50 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं की उम्मीद, सुविधाओं पर खास ध्यान-सिंहस्थ 2028 में 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इस विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार व्यापक स्तर पर तैयारियां कर रही है। उज्जैन और आसपास के इलाकों में नई सड़कें, फ्लाईओवर, पुल-पुलिया, क्षिप्रा नदी पर पक्के घाट, आधुनिक ठहरने के इंतजाम और बड़े अस्पताल बनाए जा रहे हैं। इसका मकसद श्रद्धालुओं को आस्था के साथ-साथ सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा का भरोसा देना है।

अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार, मंजूर हो चुके हैं 20,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट-मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार, फिलहाल 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के अधोसंरचना प्रोजेक्ट पहले ही मंजूर हो चुके हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और शहरी विकास से जुड़े कई बड़े काम शामिल हैं। अगर केंद्र से विशेष पैकेज मिल जाता है तो इन परियोजनाओं को और बेहतर और तेजी से पूरा किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि सिंहस्थ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का बड़ा अवसर है।

जीएसडीपी के आंकड़ों पर बहस, 4,500 करोड़ अतिरिक्त कर्ज लेने की तैयारी-बैठक में मध्यप्रदेश ने कर्ज सीमा से जुड़ा मुद्दा भी मजबूती से उठाया। राज्य ने बताया कि 15वें वित्त आयोग ने मध्यप्रदेश का जीएसडीपी 16.94 लाख करोड़ रुपये आंका है, जबकि केंद्र कर्ज सीमा तय करते समय 15.44 लाख करोड़ मान रहा है। अगर वित्त आयोग के आंकड़े माने जाएं तो मध्यप्रदेश करीब 4,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज ले सकेगा। इससे सिंहस्थ और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना आसान होगा। सरकार का कहना है कि सही आंकड़ों के आधार पर कर्ज सीमा तय होना विकास की रफ्तार के लिए बेहद जरूरी है।

 

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