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Politics

मुंबई की सियासत में बड़ा मोड़? बीएमसी पर 25 साल बाद ठाकरे पकड़ ढीली, एग्जिट पोल में बीजेपी आगे

मुंबई की कुर्सी पर किसका कब्ज़ा? एग्जिट पोल ने बढ़ाई धड़कन-मुंबई में बीएमसी चुनाव का नतीजा हर किसी की नजरों में है। 25 साल से ठाकरे परिवार का कब्ज़ा खतरे में दिख रहा है। इस चुनाव का असर सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस चुनाव की अहमियत, एग्जिट पोल के रुझान और इसके राजनीतिक मायने।

बीएमसी क्यों है इतना महत्वपूर्ण?-बीएमसी सिर्फ एक नगर निगम नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी और ताकतवर स्थानीय संस्था है। इसका सालाना बजट करीब 70 हजार करोड़ रुपये है और रिजर्व फंड लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का है। मुंबई मेयर की कुर्सी बीजेपी के लिए लंबे समय से एक बड़ा सपना रही है। अगर इस बार बीजेपी को जीत मिली, तो यह न केवल मुंबई की राजनीति में बदलाव होगा, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी संकेत देगा। इसलिए बीएमसी चुनाव को महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।

ठाकरे परिवार के लिए बड़ा झटका?-ठाकरे परिवार ने बीएमसी पर 25 साल तक कब्ज़ा बनाए रखा था। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस दोनों के लिए यह चुनाव बेहद अहम था। मुंबई हमेशा से शिवसेना का गढ़ रही है, और बीएमसी उसकी ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण। अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा। यह हार सिर्फ एक नगर निगम की हार नहीं, बल्कि मुंबई के दिल पर पकड़ कमजोर पड़ने जैसा होगा।

एग्जिट पोल का गणित: बीजेपी और महायुति आगे-एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी और उसके महायुति सहयोगी—एकनाथ शिंदे की शिवसेना और रामदास आठवले की आरपीआई (ए)—को 130 से 150 सीटों के बीच बढ़त मिल सकती है। वहीं ठाकरे गुट और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) को 50 से 60 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। कांग्रेस और उसके सहयोगी 15 से 20 सीटों के आसपास रह सकते हैं। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो बीएमसी की सत्ता का रंग पूरी तरह बदल सकता है।

अलग-अलग सर्वे, एक ही रुझान: बीजेपी सबसे आगे-कई एग्जिट पोल्स ने अलग-अलग आंकड़े दिए हैं, लेकिन सभी का रुझान लगभग एक जैसा है। Axis My India, Praja Poll Analytics, Janmat Polls और Jubilant Data Studio जैसे प्रमुख सर्वेक्षणों के अनुसार बीजेपी गठबंधन को भारी बढ़त मिल रही है। ठाकरे गुट और कांग्रेस गठबंधन पीछे नजर आ रहे हैं। यह संकेत देता है कि मुंबई में सत्ता परिवर्तन संभव है।

बीएमसी का इतिहास: शिवसेना का दबदबा-बीएमसी में ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना का दबदबा साफ नजर आता है। 1997 से लेकर 2017 तक शिवसेना लगातार नंबर वन पार्टी रही है। 2017 के चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी 82 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी। कांग्रेस, एनसीपी और एमएनएस के बीच मुकाबला चलता रहा। इस बार अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो यह बीएमसी के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा।

 

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