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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केंद्र में बड़ा घोटाला: मिट्टी और कंकड़ से छुपाई गई 3200 क्विंटल धान की चोरी

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में धान खरीदी केंद्र से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। भौतिक सत्यापन के दौरान करीब 3200 क्विंटल धान की कमी पाई गई, जिसकी कीमत लगभग 99 लाख 20 हजार रुपये बताई जा रही है। जांच में पता चला कि धान की कमी को छुपाने के लिए बोरियों में मिट्टी और कंकड़ मिलाए जा रहे थे। इस लेख में हम इस घोटाले की पूरी कहानी और प्रशासन की कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

आधी रात की छापेमारी में खुली बड़ी गड़बड़ी-डभरा क्षेत्र के पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में जिला नोडल अधिकारी वासू जैन के नेतृत्व में टीम ने अचानक आधी रात को छापा मारा। मौके पर देखा गया कि कई बोरियों में धान की जगह मिट्टी और कंकड़ भरे हुए थे। टीम ने तुरंत पंचनामा तैयार किया और संदिग्ध धान को जब्त कर लिया। यह कार्रवाई घोटाले की गंभीरता को दर्शाती है।

हर बोरी में मिली 5 से 10 किलो मिट्टी-कंकड़-जांच के दौरान एक-एक बोरी खोलकर देखा गया तो चौंकाने वाला सच सामने आया। ज्यादातर बोरियों में 5 से 10 किलो तक मिट्टी और कंकड़ मिले। कुछ बोरियों में तो लगभग 30 किलो धान और 10 किलो मिट्टी-कंकड़ पाए गए। इससे साफ हो गया कि धान की कमी को जानबूझकर छुपाने की कोशिश की गई थी।

धान खरीदी केंद्र की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल-इतनी बड़ी मात्रा में धान गायब होना और उसकी जगह मिट्टी-कंकड़ भरना बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। इस पूरे मामले ने धान खरीदी केंद्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है।

नोडल अधिकारी का बयान: दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई-जिला नोडल अधिकारी वासू जैन ने बताया कि धान की कमी की शिकायत मिलने पर देर रात दबिश दी गई थी। जांच में गड़बड़ी साफ नजर आई है। धान खरीदी प्रभारी को तुरंत हटा दिया गया है और पूरे मामले की गहन जांच चल रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

किसानों के हित में नई व्यवस्था और भरोसा-प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि किसानों को धान बेचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए नए प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि खरीदी व्यवस्था सुचारू रूप से चलेगी और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह कदम किसानों के भरोसे को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

 

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