मुंगेली में धान खरीदी घोटाले ने हिला दिया प्रशासन, सख्त कार्रवाई जारी

मुंगेली जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। ICCC मार्कफेड रायपुर की रिपोर्ट के बाद कलेक्टर कुंदन कुमार ने तुरंत सख्त कदम उठाए। जांच में धान ओवरलोडिंग 200 से 1116 प्रतिशत तक पाई गई, जिसके बाद कई कर्मचारियों को निलंबित कर FIR दर्ज की गई है।
संयुक्त जांच में सामने आया पूरा खेल-कलेक्टर के आदेश पर गठित संयुक्त जांच टीम ने पाया कि खरीदी प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने जानबूझकर नियमों की अवहेलना की। अनधिकृत वाहनों से मिलरों तक धान पहुंचाया गया और यह सब एक साजिश के तहत किया गया। इस मिलीभगत से शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
किन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई?-जिले के पांच धान उपार्जन केंद्रों के नौ कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर सेवा से अलग किया गया है। इनमें फंदवानी, निरजाम, नवागांव घुटेरा, तरवरपुर और सिंघनपुरी समितियों के खरीदी प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और एक समिति प्रबंधक शामिल हैं। सभी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।
निलंबन और FIR किसके आदेश पर हुई?-यह कार्रवाई सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला मुंगेली के निर्देश पर की गई। साथ ही जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर के नोडल कार्यालय के पत्रों के आधार पर सभी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। यह कदम कलेक्टर की संयुक्त जांच रिपोर्ट के बाद उठाया गया है।
मामला गंभीर दुराचार की श्रेणी में-प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों का कृत्य प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के सेवा नियम 2018 की कंडिका 16.4 के तहत गंभीर दुराचार माना जाता है। इसलिए बिना देरी किए निलंबन, सेवा से पृथक करने और FIR दर्ज करने की कार्रवाई की गई है। इस खबर ने जिले की सहकारी समितियों में हड़कंप मचा दिया है।
पहले भी हो चुकी हैं सख्त कार्रवाइयां-धान खरीदी में गड़बड़ी के चलते दो दिन पहले ही जिला खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया था। इसके अलावा फर्जी परिवहन के आरोप में कुछ राइस मिलर्स को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। ICCC मार्कफेड की सतत जांच जारी है और आगे और नाम सामने आने की संभावना है।



