Google Analytics Meta Pixel
Business

डॉलर के सामने रुपया ढहा: 92.messe 18 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, कच्चे तेल की आग ने बढ़ाई टेंशन

अमेरिकी-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे भारतीय रुपया और शेयर बाजार दोनों पर दबाव पड़ा है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय मुद्रा, आयात बिल और शेयर बाजार को प्रभावित कर रही हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपया कमजोर-ब्रेंट क्रूड की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे घरेलू मुद्रा रुपया दबाव में आ गया है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, और इसका असर रुपया पर साफ दिख रहा है। बुधवार को रुपया 69 पैसे गिरकर 92.18 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर 91.49 से काफी नीचे है।

निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं-बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। विदेशी पूंजी की निकासी और महंगे तेल के आयात की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। डॉलर इंडेक्स में भी हल्की बढ़त देखी गई है, जो डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।

महंगे तेल से बढ़ेगा भारत का आयात बिल-भारत अपनी लगभग 85 प्रतिशत ईंधन जरूरतों के लिए तेल का आयात करता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हर बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव और बढ़ सकते हैं।

शेयर बाजार में भी दिखी भारी गिरावट-तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है। सेंसेक्स 1,671 अंकों से ज्यादा गिरकर 78,567 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 502 अंकों की गिरावट के साथ 24,363 के करीब पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 3,295 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर और दबाव पड़ा।

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय रुपया और शेयर बाजार दोनों को प्रभावित किया है। महंगे तेल के कारण भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जो महंगाई और आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकता है। ऐसे समय में निवेशकों का सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना स्वाभाविक है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है और इसके लिए सतर्कता जरूरी है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button