एनसीआर में 1 अक्टूबर से बिना PUCC ईंधन नहीं मिलेगा, प्रदूषण पर सख्ती

1 अक्टूबर से बड़ा नियम लागू: बिना PUCC वाले वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, NCR में सख्ती शुरू
एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए यूपी सरकार का सख्त फैसला-दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के आठ जिलों में ऐसे वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा जिनके पास वैध Pollution Under Control Certificate (PUCC) नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण होगा और हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
एनसीआर के आठ जिलों में लागू होगा नया नियम-गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली—ये आठ जिले एनसीआर का हिस्सा हैं जहां यह नियम लागू होगा। 1 अक्टूबर से इन जिलों के पेट्रोल पंपों पर बिना वैध PUCC वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह कदम प्रदूषण कम करने में अहम साबित होगा।
प्रदूषण में 30-35 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य-उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस. पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि वर्ष 2026 के अंत तक एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण को 30 से 35 प्रतिशत तक कम किया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर प्रभावी रणनीति बनानी होगी और जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
विभागों को मिला खास निर्देश-मुख्य सचिव ने कहा कि वायु प्रदूषण रोकना सिर्फ एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवहन, नगर विकास, उद्योग, पर्यावरण समेत सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें ताकि लोगों को साफ और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
आम जनता की भागीदारी भी जरूरी-सरकार का मानना है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण और वाहन प्रदूषण नियंत्रण के प्रति सजग किया जाएगा। जब तक जनता सहयोग नहीं करेगी, प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण मुश्किल होगा।
पेट्रोल पंपों पर हाईटेक निगरानी होगी-नए नियम को प्रभावी बनाने के लिए एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर वैध PUCC की जांच करेंगे। इससे नियमों का सख्ती से पालन होगा और गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगेगी।
वाहन प्रदूषण के साथ अन्य स्रोतों पर भी नजर-बैठक में वाहन प्रदूषण के अलावा औद्योगिक प्रदूषण, सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा, हरित क्षेत्र का विस्तार और पराली प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने इन सभी क्षेत्रों में सख्ती बढ़ाने और नई योजनाएं लागू करने का फैसला किया है।
पुराने वाहनों को हटाने की योजना-सरकार पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने की तैयारी कर रही है। ‘नया सफर’ योजना के तहत BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि स्वच्छ ईंधन वाले वाहन बढ़ें और प्रदूषण कम हो।
लाखों पुराने वाहन प्रशासन की निगरानी में-एनसीआर में करीब 26.19 लाख पुराने वाहन चिन्हित किए गए हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 वाहनों को स्क्रैप किया गया और 460 वाहनों को जब्त किया गया। सरकार इस अभियान को और तेज करने की योजना बना रही है।
इलेक्ट्रिक बसों से बदलेंगे परिवहन के रंग-सरकार ने गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल करीब 100 ई-बसें चल रही हैं। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
साफ हवा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता-उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि एनसीआर में बेहतर वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मकसद सिर्फ नियम लागू करना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ वातावरण देना है।



