विदेश में फंसी मध्यप्रदेश की बेटी सुरक्षित लौटी भारत, सीएम मोहन यादव के प्रयास रंग लाए

मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों से सुरक्षित लौटी प्रियांशी, देश-प्रदेश का नाम किया रोशन-मध्यप्रदेश की युवा पहलवान प्रियांशी प्रजापत की सुरक्षित वापसी ने पूरे प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल बना दिया है। अल्बानिया में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप रैंकिंग सीरीज़ में हिस्सा लेने गई प्रियांशी को युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच सुरक्षित भारत लाने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भूमिका अहम रही। आइए जानते हैं इस प्रेरणादायक कहानी के हर पहलू।
प्रियांशी की सुरक्षित वापसी से परिवार और प्रदेश में खुशी-अल्बानिया के तिराना से प्रियांशी प्रजापत की सुरक्षित वापसी ने उनके परिवार और पूरे प्रदेश को राहत दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगातार प्रयासों और उच्च स्तरीय संपर्कों की वजह से यह संभव हो पाया। जैसे ही प्रियांशी भारत पहुंचीं, उनके परिवार ने राहत की सांस ली और मुख्यमंत्री का आभार जताया। यह घटना प्रदेश के लिए गर्व का विषय बनी।
रजत पदक जीतकर देश-प्रदेश का मान बढ़ाया-प्रियांशी ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। 26 फरवरी को हुए मुकाबलों में उन्होंने कजाकिस्तान, अमेरिका और मेजबान अल्बानिया की पहलवानों को हराकर अपनी ताकत दिखाई। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत का नाम रोशन किया। मुख्यमंत्री ने भी उनकी इस सफलता पर बधाई दी और कहा कि प्रियांशी जैसी बेटियां देश का भविष्य हैं।
युद्ध जैसे हालात में फंसे थे खिलाड़ी-प्रतियोगिता के दौरान मध्य-पूर्व और एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई खिलाड़ी अल्बानिया में फंसे रह गए थे। प्रियांशी समेत अन्य खिलाड़ियों को भी कुछ समय तक वहीं रुकना पड़ा। इस खबर ने परिवार और प्रदेशवासियों में चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन सरकार की सक्रियता ने इस मुश्किल स्थिति को संभाला और खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार से की बात, लगातार किए प्रयास-इस संकट के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने व्यक्तिगत रूप से प्रियांशी की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार काम किया। उन्होंने उज्जैन में रहने वाले प्रियांशी के परिवार से वीडियो कॉल पर बात की और भरोसा दिलाया कि उनकी बेटी सुरक्षित लौटेगी। इस संवेदनशीलता और सहयोग के लिए प्रियांशी के पिता ने मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद किया।
पहले भी मिल चुका है मुख्यमंत्री का सहयोग-प्रियांशी की प्रतिभा को मुख्यमंत्री पहले से पहचानते थे। जब वे मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने प्रियांशी को आर्थिक मदद दी थी। उस समय दो लाख रुपये की सहायता देकर उन्होंने प्रियांशी को खेल और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने का मौका दिया। परिवार का कहना है कि मुख्यमंत्री हमेशा उन्हें अपनी बेटी की तरह स्नेह और समर्थन देते रहे हैं।
एशियन सीरीज़ में भी जीता था स्वर्ण पदक-प्रियांशी का खेल करियर लगातार आगे बढ़ रहा है। पिछले साल उन्होंने एशियन सीरीज़ में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित की थी। अब वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने फिर दिखा दिया कि मेहनत और लगन से कोई भी खिलाड़ी देश का नाम ऊंचा कर सकता है। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
प्रियांशी प्रजापत की सुरक्षित वापसी और उनकी उपलब्धियां मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के समर्पित प्रयासों ने इस मुश्किल वक्त में एक मिसाल कायम की है। यह कहानी बताती है कि सही नेतृत्व और समर्थन से युवा खिलाड़ी न केवल देश का नाम रोशन कर सकते हैं, बल्कि कठिनाइयों को भी पार कर सकते हैं।



