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बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद: राष्ट्रपति के बयान पर ममता बनर्जी और पीएम मोदी आमने-सामने

पश्चिम बंगाल में आदिवासी विकास पर विवाद: राष्ट्रपति के बयान से गरमाई राजनीति-पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आदिवासी विकास को लेकर दिए बयान के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। इस विवाद ने आदिवासी विकास, चुनावी रणनीति और संवैधानिक मर्यादा जैसे मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

राष्ट्रपति के बयान ने उठाए आदिवासी विकास के सवाल-उत्तर बंगाल में हुए 9वें इंटरनेशनल संताल सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी समुदाय के विकास पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संताल और अन्य आदिवासी समुदायों ने देश के लिए बहुत योगदान दिया, लेकिन उन्हें विकास का पूरा लाभ नहीं मिला। इस बयान ने सीधे उत्तर बंगाल के आदिवासी इलाकों की विकास दर पर सवाल उठाए और राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया।

ममता बनर्जी ने बीजेपी के इशारे पर बयान देने का आरोप लगाया-मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह टिप्पणी बीजेपी की सलाह पर की गई है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है और राज्य सरकार के विकास कार्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ममता ने संवैधानिक पद का राजनीतिक इस्तेमाल करने पर भी दुख जताया।

कार्यक्रम के आयोजन और कम उपस्थिति पर उठे सवाल-राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम के स्थान परिवर्तन और कम उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को बिधाननगर से बागडोगरा एयरपोर्ट के पास स्थानांतरित करने से कई आदिवासी प्रतिभागियों के लिए पहुंचना मुश्किल हो गया। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से ज्यादा भागीदारी की उम्मीद थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने टीएमसी सरकार पर साधा निशाना-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर टीएमसी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और उसका सम्मान होना चाहिए। मोदी ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि टीएमसी सरकार ने राष्ट्रपति के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

अभिषेक बनर्जी ने केंद्र पर दबाव बनाने का आरोप लगाया-टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने प्रधानमंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार और एजेंसियां मिलकर पश्चिम बंगाल को घेरने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग हर दबाव का सामना करने को तैयार हैं और उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती।

आदिवासी वोट बैंक पर चुनाव से पहले बढ़ी सियासी लड़ाई-पश्चिम बंगाल में आदिवासी वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण है। राज्य में 16 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं और करीब 15 अन्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता प्रभाव रखते हैं। इसलिए चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल इन समुदायों तक पहुंच बनाने में लगे हैं। राष्ट्रपति के बयान से शुरू हुआ विवाद चुनावी माहौल को और गर्म कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में आदिवासी विकास को लेकर राष्ट्रपति के बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग ने इस मुद्दे को संवैधानिक मर्यादा और चुनावी रणनीति के संदर्भ में और जटिल बना दिया है। आदिवासी वोट बैंक की अहमियत को देखते हुए यह विवाद आने वाले चुनावों में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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