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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मिली रिहाई, केंद्र सरकार ने NSA के तहत हिरासत खत्म की

सोनम वांगचुक की जोधपुर जेल से रिहाई: केंद्र सरकार ने हटाई हिरासत, समर्थकों में खुशी की लहर- प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ लगी हिरासत को तुरंत प्रभाव से खत्म करने का फैसला लिया, जिससे उनकी रिहाई संभव हो सकी। यह खबर आते ही उनके समर्थकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में राहत और खुशी का माहौल बन गया।

जोधपुर सेंट्रल जेल से दोपहर में हुई रिहाई-सोनम वांगचुक को शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। इस बात की पुष्टि रतनाड़ा पुलिस स्टेशन के एसएचओ दिनेश लाखावत ने की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं और फिर वांगचुक को जेल से बाहर आने की अनुमति मिली।

केंद्र सरकार ने हटाई हिरासत, NSA के तहत थी बंदी-सोनम वांगचुक को पहले नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया था, जिसके तहत लंबे समय तक नजरबंदी की जा सकती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस हिरासत को तुरंत प्रभाव से खत्म करने का आदेश दिया है, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

पत्नी गीतांजलि आंगमो ने पूरी की रिहाई की प्रक्रिया-रिहाई के वक्त सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो भी जोधपुर पहुंचीं। उन्होंने जेल प्रशासन के साथ मिलकर रिहाई से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। रिहाई के बाद परिवार और समर्थकों ने इसे एक बड़ी राहत और महत्वपूर्ण घटना बताया।

सितंबर 2025 में हुई थी हिरासत, लद्दाख के विरोध प्रदर्शन के दौरान-सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लद्दाख के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुई थी। उस वक्त लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, कई लोग घायल-विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक झड़पों में 45 से ज्यादा लोग घायल हुए थे, जिनमें करीब 22 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए थे।

सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई-प्रशासन का कहना था कि सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में इसलिए रखा गया ताकि इलाके में कानून-व्यवस्था बनी रहे। हिरासत के बाद उन्हें लद्दाख से जोधपुर की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां वे कई महीनों तक बंद रहे।

सोनम वांगचुक की रिहाई से उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है और इसे एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगे की घटनाओं पर टिकी हैं कि आगे क्या होगा।

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