फर्जी नामों के हटने से बदलेगा चुनावी खेल: सुवेंदु अधिकारी का दावा

सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में करीब 79 लाख फर्जी नाम हटाए गए हैं। उनका मानना है कि इससे चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। आइए जानते हैं इस दावे के पीछे की पूरी कहानी।
साफ-सुथरे चुनाव के लिए जरूरी था पुनरीक्षण-पूर्वी मेदिनीपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अधिकारी ने बताया कि यह पुनरीक्षण प्रक्रिया चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए जरूरी थी। इससे असली मतदाताओं की ताकत सामने आएगी और चुनावी व्यवस्था मजबूत होगी।
टीएमसी पर फर्जी वोटरों के सहारे सत्ता में बने रहने का आरोप-अधिकारी ने आरोप लगाया कि Trinamool Congress लंबे समय से फर्जी वोटरों के सहारे सत्ता में बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त है, जिससे चुनाव में असली मतदाताओं की भूमिका मजबूत होगी और फर्जी वोट खत्म होंगे।
‘नाश्ता-लंच-डिनर’ के जरिए समझाया आंकड़ा-अपने बयान को आसान भाषा में समझाते हुए अधिकारी ने कहा कि नाश्ते में 58 लाख, लंच में 7 लाख और शाम की चाय में 14 लाख नाम हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक कुल 79 लाख नाम सूची से बाहर हो चुके हैं, जो चुनावी खेल को पूरी तरह बदल देंगे।
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों पर सस्पेंस-हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक साफ नहीं किया है कि कितने नाम हटाए गए और कितनों को रखा गया। पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट में कितने नाम हटे, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी अपने दावों पर कायम हैं और इसे बीजेपी के लिए बड़ा फायदा बता रहे हैं।
90% फर्जी वोट टीएमसी के पक्ष में जाते थे-अधिकारी ने दावा किया कि हटाए गए फर्जी वोटरों में से करीब 90 प्रतिशत वोट Trinamool Congress को मिलते थे। अब जब ये नाम हट गए हैं, तो चुनाव में वास्तविक जनमत सामने आएगा और बीजेपी को मजबूत बढ़त मिलेगी।
ममता बनर्जी पर निशाना, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला-अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का विरोध कर रही हैं और इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गई हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी यह प्रक्रिया कई बार हुई है, लेकिन इस बार टीएमसी इसे रोकने की कोशिश कर रही है क्योंकि इससे उनके वोट बैंक पर असर पड़ेगा।
बीजेपी की चुनावी रणनीति: मतदाताओं को तीन हिस्सों में बांटना-बीजेपी नेता ने कार्यकर्ताओं को कहा कि वे मतदाताओं को पक्के समर्थक, विरोधी और डगमगाने वाले वोटर में बांटें। साथ ही, जो लोग रोजगार के लिए बाहर गए हैं, उन्हें वापस बुलाकर वोट डालने के लिए प्रेरित करें ताकि हर वोट का पूरा इस्तेमाल हो सके।
177 सीटों का दावा और बड़े वादे-अधिकारी ने भरोसा जताया कि इस बार बीजेपी कम से कम 177 सीटें जीतेगी। उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में पार्टी के पास सिर्फ 3 सीटें थीं, जो 2021 में बढ़कर 77 हो गईं। साथ ही, उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना, महिलाओं को आर्थिक सहायता और लाखों सरकारी नौकरियों का वादा किया।
‘परिवर्तन’ के लिए राम नवमी पर शपथ की अपील-अधिकारी ने लोगों से अपील की कि वे राम नवमी के मौके पर “परिवर्तन” लाने का संकल्प लें। उन्होंने इस चुनाव को “राष्ट्रवादी और सनातनी सरकार” बनाने की लड़ाई बताया और कहा कि यह मौका है जब राज्य की दिशा बदली जा सकती है।
सुवेंदु अधिकारी के दावों के मुताबिक फर्जी नामों के हटने से चुनावी खेल में बड़ा बदलाव आएगा और बीजेपी को फायदा होगा। हालांकि चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह प्रक्रिया चुनाव को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



