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8 साल बाद चीन पहुंचे ट्रंप, Xi Jinping संग होगी कई बड़े मुद्दों पर बातचीत

ट्रंप का बड़ा चीन दौरा: 8 साल बाद Xi Jinping से होगी अहम बातचीत-Trump China Visit 2026: ट्रेड वॉर से लेकर Iran Oil Trade तक, दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर चर्चा डोनाल्ड ट्रंप 8 साल बाद चीन के बीजिंग पहुंचे हैं। यह उनका पहला दौरा है जो वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच हो रहा है। 13 से 15 मई तक ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है।

8 साल बाद ट्रंप का बीजिंग आगमन-ट्रंप का यह दौरा 2017 के बाद पहला है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, ताइवान, AI, रेयर अर्थ मिनरल्स और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। गुरुवार और शुक्रवार को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें होंगी, जिनमें ये विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुलाकात वैश्विक बाजारों की दिशा तय कर सकती है।

चीन रवाना होने से पहले ट्रंप का बयान-ट्रंप ने अमेरिका और चीन को दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका सैन्य रूप से सबसे मजबूत है और चीन दूसरे नंबर पर। उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध और Strait of Hormuz संकट पर भी Xi Jinping से चर्चा होगी। यह संकेत है कि दौरा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डालेगा।

Xi Jinping ने ट्रंप के लिए रखा भव्य स्टेट डिनर-Xi Jinping ने ट्रंप के सम्मान में राजकीय रात्रिभोज का आयोजन किया, जो चीन में विदेशी नेताओं के लिए बड़ा सम्मान माना जाता है। यह कार्यक्रम बीजिंग के Great Hall of the People में हुआ, जहां चीन की शीर्ष लीडरशिप और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह स्वागत दर्शाता है कि चीन अमेरिका के साथ रिश्तों को अभी भी अहम मानता है।

ट्रेड वॉर रहेगा बातचीत का मुख्य मुद्दा-अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे ट्रेड टैरिफ विवाद पर चर्चा होगी। ट्रंप पहले भी चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाने की बात कर चुके हैं। उम्मीद है कि दोनों नेता व्यापार तनाव कम करने और नए समझौते पर विचार करेंगे। सकारात्मक बातचीत से वैश्विक बाजारों में स्थिरता आ सकती है।

Taiwan और हथियार डील पर बढ़ सकता है तनाव-ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में Taiwan का मुद्दा भी अहम रहेगा। ट्रंप ताइवान को दिए जाने वाले 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर चर्चा कर सकते हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका की इस डील का विरोध करता है। इस मुद्दे पर सहमति न बनने पर तनाव बढ़ने की संभावना है।

Iran Oil Trade बना बड़ी टेंशन का कारण-अमेरिका का आरोप है कि चीन ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है, जिससे तेहरान को आर्थिक मदद मिल रही है। चीन इसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा मानता है और सस्ता तेल खरीदने में कोई समस्या नहीं देखता। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस दौरे में इसका समाधान कैसे निकलेगा।

 

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