पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: एक्साइज ड्यूटी घटी, कीमतें फिलहाल स्थिर

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला: आम जनता को मिली राहत-सरकार ने हाल ही में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल को पूरी तरह से इस ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है। यह फैसला मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण बढ़े हुए तेल दामों के प्रभाव को कम करने के लिए लिया गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर-मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए यह उछाल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है।
एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती-सरकार ने 26 मार्च को एक अधिसूचना जारी कर पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं डीजल पर लगने वाली 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया गया है। यह बदलाव तुरंत लागू कर दिया गया है ताकि तेल की बढ़ती कीमतों का असर आम जनता पर कम हो।
कीमतें स्थिर, कंपनियों पर बढ़ा दबाव-अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी तक नहीं बढ़ाए गए हैं। इससे तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। सरकार ने इस दबाव को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाकर कंपनियों को राहत देने की कोशिश की है ताकि वे कीमतों को स्थिर रख सकें।
तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी-एक्साइज ड्यूटी में कटौती की खबर के बाद IOC, BPCL और HPCL जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि इस फैसले से कंपनियों के घाटे में कमी आएगी और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। यह कदम कंपनियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
महंगे तेल से हो सकता था बड़ा नुकसान-रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती, तो कंपनियों को पेट्रोल पर 11 रुपये और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता था। ऐसे में सरकार का यह कदम कंपनियों के लिए जरूरी और समय पर लिया गया फैसला माना जा रहा है।
भारत की आयात पर निर्भरता बड़ी चुनौती-भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल और आधा प्राकृतिक गैस आयात करता है। ज्यादातर सप्लाई हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई और कीमत दोनों प्रभावित हुए हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निजी कंपनियों ने बढ़ाए दाम-जहां सरकारी तेल कंपनियां अभी तक कीमतें स्थिर रखे हुए हैं, वहीं कुछ निजी कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। उदाहरण के लिए, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। हालांकि जियो-बीपी ने अभी तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
आगे की स्थिति क्या होगी?-फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां कीमतों को नियंत्रण में रखने की पूरी कोशिश कर रही हैं। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो इसका असर आम जनता पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में इस स्थिति का विकास किस दिशा में होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
इस तरह सरकार का यह फैसला न केवल आम लोगों को राहत देने के लिए है, बल्कि तेल कंपनियों को भी आर्थिक दबाव से बचाने का प्रयास है। भविष्य में तेल की कीमतों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।



