पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कांग्रेस ने अकेले लड़ने का बड़ा फैसला, जानिए पूरा प्लान

चुनाव की तैयारियों में कांग्रेस का नया कदम-पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे। इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। भाजपा ममता बनर्जी की सरकार को चुनौती दे रही है, वहीं कांग्रेस ने लगभग 20 साल बाद अकेले ही सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने अपना घोषणापत्र भी जारी कर दिया है।
घोषणापत्र में अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी पर खास जोर-7 अप्रैल को कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें राज्य की बिगड़ी अर्थव्यवस्था सुधारने और बेरोजगारी कम करने को प्राथमिकता बताया गया। पार्टी ने वादा किया है कि नई नीतियों से रोजगार और निवेश बढ़ाएंगे, जिससे युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिलाओं और किसानों के लिए बड़े वादे-कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपये आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। किसानों को सालाना 15,000 रुपये दिए जाएंगे। साथ ही मुफ्त बिजली और कृषि उत्पादों की बेहतर खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है, ताकि किसानों को सही दाम मिल सकें और उनकी आर्थिक स्थिति सुधरे।
युवाओं के लिए रोजगार और AI सेक्टर पर फोकस-युवाओं को रोजगार देने के लिए कांग्रेस ने सरकारी खाली पद भरने का वादा किया है। इसके अलावा, हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर विकसित करने और स्थानीय स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने की योजना भी है। इससे नई तकनीक के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता-कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था सुधार को भी अपने एजेंडे में रखा है। पार्टी का कहना है कि राज्य में ‘कानून का राज’ स्थापित किया जाएगा और किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, मुफ्त शिक्षा और 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का भी वादा किया गया है।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का भरोसा-पार्टी ने भ्रष्टाचार को गंभीर समस्या बताया है और इसे खत्म करने का भरोसा दिया है। हाल ही में एक मंत्री के पास से बड़ी रकम बरामद होने जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाकर जनता का भरोसा फिर से हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्टार प्रचारकों की लिस्ट में बड़े नाम-चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे बड़े नेता शामिल हैं। सभी वरिष्ठ नेता अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर प्रचार करेंगे और पार्टी को मजबूत बनाएंगे।
अकेले चुनाव लड़ने का कारण-कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उसका जनाधार लगातार घटता गया है। 2016 में 44 सीटें जीतने वाली पार्टी 2021 में एक भी सीट नहीं जीत सकी। भाजपा ने कांग्रेस की जगह मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी है, इसलिए कांग्रेस अब खुद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
गठबंधन की विफलता और रणनीति में बदलाव-2016 और 2021 में वाम दलों के साथ गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं हुआ। वाम दलों की लोकप्रियता घटने से कांग्रेस भी कमजोर हुई। पारंपरिक गढ़ मालदा और मुर्शिदाबाद में भी पार्टी कमजोर पड़ गई। इसलिए इस बार कांग्रेस ने गठबंधन से दूरी बनाकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
भाजपा की बढ़ती ताकत से बढ़ी चुनौती-भाजपा ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। 2016 में 3 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 2021 में 77 सीटें हासिल कीं और मुख्य विपक्षी दल बन गई। इस वजह से कांग्रेस के लिए मुकाबला और भी कठिन हो गया है।
संगठन को मजबूत करने पर कांग्रेस का फोकस-पार्टी नेताओं का मानना है कि पिछले गठबंधनों ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को कमजोर किया। पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा कि सभी नेताओं से चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। अब पार्टी संगठन को मजबूत कर चुनाव की तैयारी में जुट गई है।



