महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर: रॉयल फैमिली से जुड़े समरजीतसिंह घाटगे फिर BJP में शामिल

पश्चिम महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव: समरजीतसिंह घाटगे की बीजेपी में वापसी-पश्चिम महाराष्ट्र के शुगर बेल्ट की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कोल्हापुर के शाही परिवार से जुड़े राजे समरजीतसिंह घाटगे ने फिर से बीजेपी का दामन थाम लिया है। यह कदम ऐसे वक्त में आया है जब क्षेत्रीय राजनीति में लगातार बदलाव हो रहे हैं और पार्टियों के बीच पकड़ मजबूत करने की होड़ तेज है। घाटगे की वापसी से आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव हो सकता है।
बीजेपी छोड़ने के पीछे की वजह और वापसी का फैसला-समरजीतसिंह घाटगे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस- के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदर चल रही कुछ दिक्कतों और राजनीतिक मजबूरियों के चलते उन्होंने बीजेपी छोड़ दी थी। इसके बाद वह शरद पवार की एनसीपी में शामिल हो गए थे, लेकिन अब उन्होंने वापसी का फैसला किया है। यह वापसी राजनीतिक माहौल को नया रंग दे सकती है।
चुनावी हार और राजनीतिक अनुभव का महत्व-घाटगे ने कोल्हापुर की कागल सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन एनसीपी के वरिष्ठ नेता हसन मुश्रीफ से हार गए। इससे पहले 2019 में भी उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और तब भी हार का सामना करना पड़ा था। ये अनुभव उनके राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण रहे हैं और अब वे इन अनुभवों के साथ बीजेपी में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहते हैं।
बीजेपी में वापसी और भविष्य की रणनीति-मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में घाटगे ने बीजेपी जॉइन किया, जहां पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद थे। उन्होंने साफ कहा कि अब वे देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में काम करते हुए पश्चिम महाराष्ट्र में पार्टी को मजबूत करेंगे। उनका खास फोकस विकास और सहकारिता क्षेत्र को आगे बढ़ाने पर रहेगा, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में बीजेपी की पकड़ मजबूत हो सके।
एनसीपी छोड़ने से पहले की बातचीत-घाटगे ने बताया कि उन्होंने एनसीपी छोड़ने से पहले शरद पवार से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि नवंबर 2025 से ही पार्टी बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। अब वे किसी तरह का राजनीतिक प्रयोग नहीं करना चाहते और पूरी तरह से बीजेपी के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और सहकारिता क्षेत्र में प्रभाव-समरजीतसिंह घाटगे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और सहकारिता क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। वे शाही छत्रपति शाहू मिल्क एंड एग्रो कंपनी के साथ-साथ एक सहकारी शुगर फैक्ट्री के चेयरमैन भी हैं। उनके परिवार का कोल्हापुर में कई संस्थानों पर गहरा प्रभाव है, जो उनकी राजनीतिक ताकत को और बढ़ाता है।
शाही विरासत और सामाजिक प्रभाव-घाटगे परिवार का संबंध महान समाज सुधारक छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज से है। यह परिवार लंबे समय से सामाजिक और सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहा है। इसी वजह से घाटगे की वापसी बीजेपी के लिए पश्चिम महाराष्ट्र के कई जिलों में मजबूत आधार तैयार कर सकती है, जो पार्टी की राजनीतिक ताकत को बढ़ाएगा।
बीजेपी के लिए घाटगे की अहमियत-पुणे, कोल्हापुर, सांगली और सतारा जैसे शुगर बेल्ट क्षेत्रों में घाटगे का प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। उनकी राजनीतिक पकड़ और सामाजिक नेटवर्क बीजेपी के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी इन इलाकों में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है, घाटगे की वापसी पार्टी के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है।



