भोपाल में 50 अफसरों की जमीन खरीद से मचा बवाल

भोपाल में 50 अफसरों की जमीन खरीद से मचा बवाल
Bhopal Land Deal: 50 IAS-IPS अफसरों ने एक साथ खरीदी जमीन, कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल- भोपाल के कोलार इलाके में करीब 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा एक साथ जमीन खरीदने का मामला अब राजनीतिक विवाद बन गया है। यह खुलासा अधिकारियों के अचल संपत्ति विवरण (IPR) की जांच के दौरान हुआ। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह संयोग नहीं हो सकता कि इतने बड़े अधिकारी एक साथ जमीन खरीदें और बाद में उसी इलाके में हाईवे और विकास परियोजनाएं शुरू हों।
एक ही दस्तावेज में हुई जमीन की रजिस्ट्री-4 अप्रैल 2022 को भोपाल के कोलार क्षेत्र में करीब 2.023 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में हुई, जिसमें लगभग 50 लोगों ने संयुक्त रूप से जमीन खरीदी। रजिस्ट्री में जमीन की कीमत 5.5 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जबकि बाजार मूल्य करीब 7.78 करोड़ था। इलाके में प्रस्तावित बायपास इस जमीन से लगभग 500 मीटर दूर से गुजरने वाला है, जिससे जमीन की कीमत बढ़ने की संभावना है।
कांग्रेस ने अंदरूनी जानकारी के इस्तेमाल के आरोप लगाए-पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल ने आरोप लगाया कि अब “प्रोजेक्ट लीक” होने लगे हैं, जहां कुछ लोगों को पहले से जानकारी मिल जाती है कि कहां बड़ा प्रोजेक्ट या हाईवे बनने वाला है। इसके बाद वहां जमीन खरीदकर भारी मुनाफा कमाया जाता है। कांग्रेस का कहना है कि यह सामान्य निवेश नहीं, बल्कि अंदरूनी जानकारी पर आधारित खेल हो सकता है।
कई बड़े अफसरों के नाम सामने आए-कांग्रेस ने दावा किया कि इस जमीन खरीद मामले में कई बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें निशिथ मिश्रा, चाहत वाजपेयी, अनुशु सिंगला, रजनी सिंह और यांगचेन डोलकर भूटिया जैसे अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारी दिल्ली और अन्य राज्यों में पदस्थ हैं। अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस ने CBI जांच की मांग की-कांग्रेस प्रवक्ता प्रवीण धोळपुर ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रदेश में जमीनों की बंदरबांट हो रही है और सरकार के कुछ मंत्री और अधिकारी इसमें शामिल हैं। विपक्ष ने कहा कि हाईवे और विकास परियोजनाओं के आसपास जमीन खरीदने के पीछे बड़े आर्थिक हित हो सकते हैं। उन्होंने स्वतंत्र CBI जांच की मांग की है।
जमीन का बदला लैंड यूज बना विवाद का कारण-जून 2024 में प्रस्तावित बायपास योजना के बाद उस जमीन का लैंड यूज बदल गया, जो अब विवाद का बड़ा कारण बन गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर किसी इलाके में पहले से विकास परियोजना की जानकारी हो और फिर वहां जमीन खरीदी जाए, तो यह बड़ा फायदा देने वाला निवेश माना जाता है। अब सभी की नजर सरकार और एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी है।



