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परीक्षा विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

NEET पेपर लीक विवाद: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज, देशभर में आंदोलन की चेतावनी-देश में लगातार परीक्षा विवाद और पेपर लीक के मामलों ने छात्रों और युवाओं में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग फिर से जोर-शोर से उठाई है। उनका कहना है कि इन गड़बड़ियों ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो पूरे देश में बड़े आंदोलन होंगे।

युवा अब छात्रों के मुद्दों पर चुप नहीं रहेंगेअभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब देश के युवा शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर चुप नहीं बैठेंगे। पिछले कुछ सालों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने छात्रों का भरोसा तोड़ा है। परीक्षा विवादों और अनिश्चितता के कारण कई छात्र मानसिक तनाव में हैं। युवा अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गए हैं और वे जवाबदेही की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य सुरक्षित हो सके।

NEET, CBSE और CUET परीक्षाओं पर उठे सवालदिपके ने बताया कि NEET, CBSE और CUET जैसी बड़ी परीक्षाओं में आई गड़बड़ियों से एक करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। लाखों छात्र मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में खामियां आने से उन्हें नुकसान होता है। बार-बार विवादों के बावजूद अब तक किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। इससे छात्रों और अभिभावकों में निराशा बढ़ रही है।

जंतर-मंतर पर हुई इस्तीफे की मांग-6 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभिजीत दिपके की संस्था ने प्रदर्शन किया, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख थी। उनका कहना था कि लगातार समस्याएं सामने आने पर जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। डॉक्टर बनने के सपने देखने वाले कई छात्र मानसिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही भी जरूरी है।

इस्तीफा नहीं मिला तो होगा देशव्यापी आंदोलन-दिपके ने साफ कहा कि शिक्षा मंत्री को शनिवार तक इस्तीफा देना होगा, नहीं तो देशभर में बड़ा आंदोलन शुरू होगा। इसकी शुरुआत पुणे से होगी, जहां 11 जून को शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा। इसके बाद लखनऊ, अमृतसर, जयपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी प्रदर्शन होंगे। यह आंदोलन सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य का सवाल है।

सरकार से नैतिक जिम्मेदारी की अपील-दिपके ने सरकार से अपील की कि वह नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे। परीक्षा प्रणाली की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने पूछा कि कब तक पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां और सर्वर फेल जैसी घटनाएं होती रहेंगी। अगर सुधार नहीं हुआ तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

20 जून को दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी-अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो 20 जून को देशभर के युवा और छात्र दिल्ली में एकत्र होंगे। दिपके खुद भी इस आंदोलन में शामिल होंगे। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसमें हिस्सा लेंगे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए आवाज उठाएं। कई राज्यों से समर्थन मिल रहा है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंता-परीक्षा विवादों ने शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। छात्र और अभिभावक चाहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से हों। परीक्षा पर सवालों का असर केवल परिणामों तक नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदों पर भी पड़ता है। इसलिए छात्र संगठनों द्वारा सुधार और जवाबदेही की मांग लगातार बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग-अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पहल कर सकते हैं, तो शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए भी कदम उठा सकते हैं। उम्मीद है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेगी और भविष्य में परीक्षा विवादों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

 

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