
कोंडागांव में वनभूमि से हटाया गया 100 एकड़ का अवैध कब्जा, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई-छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब 100 एकड़ वनभूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है। मालगांव, धुंसी और बुडरा इलाके में लंबे समय से कब्जा कर खेती और निर्माण किए गए थे। इस बड़े अभियान में अवैध निर्माण हटाए गए और जमीन को फिर से वन विभाग के नियंत्रण में लिया गया। यह वन संरक्षण के लिए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
वर्षों से बढ़ रहा था वनभूमि पर कब्जा-वन विभाग के अनुसार कई परिवारों ने धीरे-धीरे वन क्षेत्र में कब्जा बढ़ाया था। लंबे समय से जंगल की जमीन पर खेती की जा रही थी और घने जंगलों को साफ कर खेत बना दिए गए थे। यह कब्जा कोई नया मामला नहीं था, बल्कि वर्षों से लगातार बढ़ता रहा। इससे वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा। विभाग ने इस अतिक्रमण को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की।
पेड़ों की कटाई कर जंगल को खेती योग्य बनाया गया-जांच में पता चला कि कब्जा करने वालों ने सिर्फ खेती नहीं की, बल्कि बहुमूल्य पेड़ों की कटाई भी की। पहले घने जंगल वाले इलाके अब खुले मैदान और खेती की जमीन बन गए हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया था ताकि जंगल खत्म हो और खेती की जा सके। इससे इलाके का हरित क्षेत्र लगातार घटता गया।
पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनाए गए कई तरीके-अतिक्रमणकारियों ने पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए कई तरीके अपनाए। केवल कटाई नहीं, बल्कि पेड़ों के तनों में गार्डलिंग की गई जिससे वे धीरे-धीरे सूख जाएं। कुछ जगह आग लगाई गई और रसायनों का भी इस्तेमाल किया गया। इन सब तरीकों से जंगल कमजोर हुआ और खेती के लिए तैयार किया गया। वन विभाग ने इस नुकसान को गंभीरता से लिया।
नोटिस के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया-कार्रवाई से पहले कई बार नोटिस जारी किए गए थे और कब्जा हटाने के लिए समय भी दिया गया था। लेकिन अतिक्रमणकारियों ने कब्जा नहीं छोड़ा और लगातार बढ़ाते रहे। जब नोटिस और चेतावनी का असर नहीं हुआ, तो वन विभाग ने राजस्व और पुलिस के साथ मिलकर बेदखली की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद कब्जा हटाकर जमीन को वापस वन विभाग के अधिकार में लिया गया।
बड़े स्तर पर चलाया गया संयुक्त अभियान-इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस ने मिलकर काम किया। पूरे इलाके का निरीक्षण किया गया और अवैध निर्माण हटाए गए। सुरक्षा के भी खास इंतजाम किए गए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई और जमीन को वन विभाग के नियंत्रण में वापस लिया गया।
अब फिर से बसाया जाएगा उजड़ा हुआ जंगल-वन विभाग की अगली योजना कब्जे से मुक्त जमीन पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की है। जहां जंगल खत्म हो चुका है, वहां नए पौधे लगाकर हरित आवरण को फिर से विकसित किया जाएगा। इससे पर्यावरण को फायदा होगा और वन्यजीवों के लिए बेहतर आवास तैयार होगा। यह कदम वन संरक्षण को मजबूत करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
ग्रामीणों ने कार्रवाई का स्वागत किया-इलाके के कई ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को सराहा है। उनका कहना है कि जंगल उनके जीवन और आजीविका का अहम हिस्सा हैं। वनों से उन्हें रोजगार, लघु वनोपज और पर्यावरणीय सुरक्षा मिलती है। वे मानते हैं कि अगर जंगलों को नुकसान पहुंचता रहा तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए अवैध कब्जा रोकना जरूरी है।
जंगल बचाने के लिए सख्त कानून की मांग-स्थानीय लोगों ने सरकार से अपील की है कि वनभूमि पर कब्जा और पेड़ों की कटाई रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं। केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि भविष्य में निगरानी भी मजबूत होनी चाहिए। उनका मानना है कि जंगलों की सुरक्षा सरकार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है और इसके लिए जागरूकता जरूरी है।
अधिकारियों का साफ संदेश: अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा-वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई को जिले में एक सख्त संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि वनभूमि पर अवैध कब्जा, पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई होगी। जिले के अन्य इलाकों में भी अतिक्रमण की पहचान की जा रही है और जहां भी कब्जा मिलेगा, वहां कानूनी कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का मकसद जंगलों को सुरक्षित रखना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।



