
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर बढ़ी चर्चा, राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेताओं के साथ किया बड़ा मंथन-पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी अपनी संगठनात्मक मजबूती पर काम कर रही है। इसी कड़ी में राहुल गांधी ने रविवार को पंजाब के पांच वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की। यह बैठक संभावित नेतृत्व बदलाव और पार्टी में चल रही गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश मानी जा रही है। कांग्रेस हाईकमान चाहता है कि चुनाव से पहले पार्टी के अंदरूनी मतभेद खत्म हों ताकि कांग्रेस मजबूती से चुनाव मैदान में उतर सके।
राहुल गांधी ने अलग-अलग नेताओं से की बातचीत-राहुल गांधी की यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई चर्चा के बाद आई है। इसमें केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल और अजय माकन भी शामिल थे। राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुक्खजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला से मुलाकात की। ये नेता पंजाब कांग्रेस की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं और नेतृत्व को लेकर चर्चा में हैं।
गुटबाजी खत्म कर एकजुट होकर चुनाव लड़ने का संदेश-पंजाब कांग्रेस में पिछले समय से नेताओं के बीच मतभेद सामने आए हैं। कई नेता संगठन और चुनावी रणनीति में ज्यादा भागीदारी चाहते हैं, जिससे अंदरूनी खींचतान बढ़ी है। राहुल गांधी ने साफ कहा कि पंजाब कांग्रेस को एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा। उन्होंने नेताओं से व्यक्तिगत मतभेद भूलकर पार्टी को प्राथमिकता देने को कहा। पार्टी मानती है कि अगर कांग्रेस एकजुट रहेगी तो चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
बाजवा और वारिंग के बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा-बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्होंने पार्टी हित में अपनी बात राहुल गांधी के सामने रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी उन्हें कोई जिम्मेदारी दे या न दे, वे कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। वहीं, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बैठक में केवल चुनावी मुद्दों और रणनीति पर चर्चा हुई और पार्टी के अंदर कोई मतभेद नहीं है।
स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता-पंजाब के हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। 1997 वार्डों में से कांग्रेस ने केवल 393 सीटें जीतीं, जबकि पांच साल पहले यह संख्या 1432 थी। वहीं आम आदमी पार्टी ने 69 से बढ़कर 954 वार्डों पर कब्जा किया। भाजपा ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है। इन नतीजों ने कांग्रेस नेतृत्व को संगठन में बदलाव और एकजुटता की जरूरत महसूस कराई है। राहुल गांधी और पार्टी लगातार चुनावी तैयारियों में जुटे हैं।



