क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण है? केंद्र की सफाई के बाद छिड़ी नई बहस

क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं? केंद्र की सफाई के बाद छिड़ी बड़ी बहस, विपक्ष ने उठाए सवाल-भारतीय पासपोर्ट को आमतौर पर सबसे भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज माना जाता है, जो पहचान और राष्ट्रीयता साबित करता है। लेकिन विदेश मंत्रालय की हालिया सफाई ने इस धारणा पर सवाल खड़ा कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि पहले से मौजूद कानून की पुष्टि है। इस बयान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि आखिर नागरिक अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे।
विदेश मंत्रालय की सफाई के बाद क्यों शुरू हुआ विवाद?-पासपोर्ट सेवा दिवस के एक कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है, न कि नागरिकता का प्रमाण देना। इस बात ने सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर बहस छेड़ दी। लोग हैरान हैं कि अगर पासपोर्ट जारी करने से पहले पहचान की जांच होती है, तो इसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जाता। सरकार ने बाद में कहा कि पासपोर्ट और नागरिकता अलग-अलग चीजें हैं, इसलिए इसे नए नियम के रूप में न लें।
सरकार ने कानून का हवाला देकर समझाया अपना पक्ष-केंद्र सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक हित में किसी को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है, चाहे वह भारतीय नागरिक हो या नहीं। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता तय होती है। सरकार ने अदालतों के फैसलों का भी जिक्र किया, जो पासपोर्ट को अंतिम प्रमाण नहीं मानतीं। मंत्रालय की सफाई कानूनी स्थिति की पुनः पुष्टि है।
आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट को लेकर लोगों में बढ़ी उलझन-पासपोर्ट को लेकर सरकार की सफाई के बाद आम लोगों में भ्रम बढ़ गया है कि आखिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का अंतिम प्रमाण होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आधार को पहचान का दस्तावेज माना, लेकिन नागरिकता नहीं। वोटर आईडी को लेकर भी अलग-अलग व्याख्याएं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि नागरिकता कई कानूनी तथ्यों पर निर्भर करती है, न कि एक दस्तावेज पर। आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया जटिल है, इसलिए स्पष्ट जानकारी जरूरी है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, नेताओं ने उठाए तीखे सवाल-विदेश मंत्रालय की सफाई के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा कि अब नागरिकता साबित करने के नए मानदंड बन रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सवाल किया कि अगर पासपोर्ट अंतिम प्रमाण नहीं तो नागरिक किस पर भरोसा करें। जावेद अख्तर और असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार की आलोचना की और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए। विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग की है।
बीजेपी ने कहा- विपक्ष जानबूझकर फैला रहा भ्रम-बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय ने कोई नई नीति नहीं बनाई। पार्टी का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर पहचान पत्र, यात्रा दस्तावेज और नागरिकता प्रमाण पत्र को मिलाकर भ्रम फैला रहा है। पासपोर्ट हमेशा से यात्रा दस्तावेज रहा है और नागरिकता कानूनों के तहत नागरिकता तय होती है। सरकार ने कहा कि पासपोर्ट नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह वैध दस्तावेज बना रहेगा।
नागरिकता कानून क्या कहता है और क्यों बढ़ी चिंता?-नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण आदि से मिलती है। इसमें कई शर्तें लागू होती हैं। इसलिए किसी एक दस्तावेज को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि CAA और NRC को लेकर पहले से बहस चल रही है। पासपोर्ट को लेकर आई नई चर्चा ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नागरिकता और दस्तावेजों को लेकर लोगों को स्पष्ट जानकारी की जरूरत है।
कानूनी स्थिति पुरानी, लेकिन बहस नई-सरकार बार-बार कह रही है कि पासपोर्ट को लेकर कोई नया नियम नहीं आया है। कानूनी स्थिति पहले जैसी ही है। लेकिन आम नागरिक अब भी नागरिकता को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं। विपक्ष और नागरिक समाज चाहते हैं कि नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो। फिलहाल पासपोर्ट यात्रा और पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस विवाद ने दिखाया कि नागरिकता और दस्तावेजों को लेकर अभी भी सवाल हैं। यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रहेगा।



