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मुहर्रम पर देशभर में इमाम हुसैन की शहादत को याद कर श्रद्धांजलि, मातमी जुलूसों में उमड़ा जनसैलाब

 

मुहर्रम पर देशभर में गूंजा या हुसैन का मातम, इमाम हुसैन की शहादत को नम आंखों से किया याद-मुहर्रम के मौके पर पूरे देश में गम और श्रद्धा का माहौल था। अलग-अलग राज्यों में शिया मुस्लिम समुदाय ने इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मजलिस, मातमी जुलूस और ताजिया निकाले। हजारों लोग जुलूसों में शामिल होकर हुसैन की कुर्बानी को याद किया और उनके बताए इंसाफ, सच्चाई और इंसानियत के रास्ते पर चलने का संदेश दिया। मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, जिसकी 10वीं तारीख आशूरा के नाम से जानी जाती है, जो कर्बला की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाती है।

जुलूस, मजलिस और ताजियों के साथ दी गई इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि-देश के कई शहरों में सुबह से ही मुहर्रम के जुलूस निकाले गए। शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर मातम करते हुए जुलूस में शामिल हुए। कई जगह ताजिए निकाले गए और मजलिसों का आयोजन हुआ, जहां कर्बला की घटना का विस्तार से जिक्र किया गया। मौलानाओं ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके संघर्ष की कहानी सुनाई। जुलूस में शामिल लोगों ने सीना पीटकर अपने गम का इजहार किया और हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन सच्चाई और इंसाफ की मिसाल के रूप में याद किया गया।

क्या है आशूरा का महत्व और क्यों याद की जाती है कर्बला की जंग?-आशूरा का दिन इस्लाम के इतिहास में बेहद अहम है। 680 ईस्वी में कर्बला में इमाम हुसैन (अ.स.) ने अत्याचार के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और अपने परिवार के साथ शहादत दी। शिया मुस्लिम इस दिन को गम और मातम के रूप में मनाते हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम विशेष नमाज अदा करते हैं और रोजा रखते हैं। कर्बला की यह घटना आज भी इंसाफ, सच्चाई, सब्र और हिम्मत की मिसाल मानी जाती है, जो पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया मुहर्रम का संदेश-मुहर्रम के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी लोगों को सच्चाई और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती है। मोदी ने कहा कि इमाम हुसैन का जीवन हमें सिखाता है कि मुश्किल हालात में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उनका त्याग और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा। प्रधानमंत्री के इस संदेश को लोगों ने खूब सराहा।

भारत में मुहर्रम का धार्मिक और सामाजिक महत्व-भारत में मुहर्रम सिर्फ धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा भी है। कई राज्यों में अलग-अलग समुदायों के लोग भी जुलूसों और ताजिया कार्यक्रमों में शामिल होकर भाईचारे का संदेश देते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। मुहर्रम भारत की साझा संस्कृति और सामाजिक एकता की मिसाल बन चुका है। इस दौरान पानी और अन्य सुविधाओं की भी व्यवस्था की जाती है।

श्रीनगर समेत कई शहरों में रहे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम-जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर समेत कई शहरों में मुहर्रम के मौके पर बड़ी संख्या में लोग मातमी जुलूसों में शामिल हुए। प्रशासन ने पहले से तय मार्गों पर जुलूस निकाले और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। ट्रैफिक व्यवस्था बदली गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की। पूरे दिन देश के विभिन्न हिस्सों में मुहर्रम श्रद्धा, शांति और अनुशासन के साथ मनाया गया।

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