करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों पर बयानबाजी पर रोक की मांग

करूर केस पर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका-तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ रहा है। DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने याचिका में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुना और अन्य संबंधित लोगों पर सीबीआई जांच पूरी होने तक सार्वजनिक बयान देने और पीड़ित परिवारों से मिलने पर रोक लगाने की भी गुहार लगाई है।
सीबीआई जांच प्रभावित होने की आशंका जताई-आर.एस. भारती ने कहा है कि जांच अभी सीबीआई कर रही है। ऐसे में अगर आरोपी या नेता लगातार बयान देते हैं या पीड़ितों से मिलते हैं, तो इससे गवाह प्रभावित हो सकते हैं और जांच निष्पक्ष नहीं रह पाएगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक सभी संबंधित लोगों को ऐसे कदम उठाने से रोका जाए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो।
करूर भगदड़ मामला क्या है?-27 सितंबर 2025 को करूर में तमिलगा वेत्री कझगम की जनसभा के दौरान भगदड़ मची थी, जिसमें 41 लोगों की मौत और 142 घायल हुए थे। इस घटना के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को जांच सीबीआई को सौंप दी थी और पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में निगरानी समिति भी बनाई गई है।
याचिका में रखी गईं अहम मांगें-आर.एस. भारती ने सिर्फ बयानबाजी पर रोक नहीं मांगी, बल्कि पीड़ित परिवारों को मिलने वाली आर्थिक मदद और सरकारी योजनाओं को भी अदालत की निगरानी में लागू करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मुआवजा, सरकारी नौकरी और अन्य राहत के फैसले सीबीआई की जानकारी और अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होने चाहिए ताकि जांच प्रभावित न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
मंत्री आधव अर्जुना के खिलाफ जांच की मांग-याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा गया है कि 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुना द्वारा दिए गए बयानों की जांच कराई जाए। आरोप है कि उनके बयानों से गवाह प्रभावित हो सकते हैं, सबूतों में छेड़छाड़ हो सकती है और जांच में बाधा आ सकती है। उन्होंने सीबीआई को इस मामले में उचित कार्रवाई करने का निर्देश देने की भी मांग की है।
तमिलनाडु की राजनीति में फिर बढ़ा तनाव-करूर भगदड़ मामले ने तमिलनाडु की राजनीति को फिर से गर्मा दिया है। DMK और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब सभी की नजर शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी है, क्योंकि इसका असर सीबीआई जांच और राज्य की राजनीति दोनों पर पड़ सकता है।



