धमतरी में बड़ी कार्रवाई: 75 हजार बोरी धान बीज पर लगी रोक, किसानों के हित में कृषि विभाग सख्त

धमतरी की सीड कंपनी में मिली बड़ी गड़बड़ी-छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कृषि विभाग ने किसानों के हित में बड़ी कार्रवाई की है। कुरूद स्थित पान सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के बीज प्रोसेसिंग और भंडारण केंद्र का अचानक निरीक्षण किया गया, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच के बाद विभाग ने करीब 75 हजार बोरी धान बीज की बिक्री, आपूर्ति और उपयोग पर तुरंत रोक लगा दी। खरीफ सीजन में किसानों तक केवल गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचें, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। अब इस मामले की गहन जांच जारी है।
निरीक्षण में सामने आईं कई अनियमितताएं-राज्य स्तरीय निरीक्षण दल ने पान सीड्स के बीज प्रोसेसिंग सेंटर का औचक निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि कंपनी ने जरूरी रिकॉर्ड विभाग को नहीं दिया और लाइसेंस में शामिल बीज किस्मों के अलावा अन्य किस्मों के बीज भी पैक और भंडारित किए जा रहे थे। स्टॉक और रिकॉर्ड में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए अधिकारियों ने तत्काल सख्त कार्रवाई की।
कच्चे और पैक बीजों की बिक्री पर लगी रोक-जांच के बाद कृषि विभाग ने कंपनी के परिसर में मौजूद कच्चे, ग्रेडिंग किए गए और पैक किए गए धान बीजों की बिक्री, आपूर्ति और उपयोग पर रोक लगा दी। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने तक ये बीज बाजार में नहीं भेजे जाएंगे। इसका मकसद किसानों तक केवल प्रमाणित और गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाना है, ताकि खरीफ सीजन में फसल की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
बीज के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए-अधिकारियों ने पैक किए गए बीजों के नमूने अपने कब्जे में लेकर राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला भेजे हैं। वहां उनकी गुणवत्ता और मानकों की जांच की जाएगी। इसके साथ ही कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
किसानों के हितों के लिए जारी रहेगा सख्त अभियान-कृषि विभाग ने साफ कहा है कि किसानों को केवल भरोसेमंद और प्रमाणित बीज ही उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसलिए पूरे राज्य में बीज उत्पादन और भंडारण केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाता रहेगा। खराब या बिना मानक वाले बीज से किसानों की मेहनत और फसल दोनों को नुकसान होता है। इसलिए विभाग किसी भी तरह के समझौते को बर्दाश्त नहीं करेगा और आगे भी सख्त कार्रवाई करता रहेगा।



