सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का सातवां दिन: तबीयत बिगड़ी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

सोनम वांगचुक की सेहत पर बढ़ता खतरा-दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे शिक्षा आंदोलन में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल सातवें दिन में पहुंच गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है और अब तक उनका करीब पांच किलो वजन घट चुका है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
CJP ने सरकार पर उठाए सवाल-CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सोनम की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि आखिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
20 छात्रों की मौत पर उठे सवाल-अभिजीत दिपके ने कहा कि परीक्षा विवादों से जुड़े मामलों में अब तक 20 छात्रों की मौत हो चुकी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इतने गंभीर हालात के बावजूद शिक्षा मंत्री को क्यों नहीं हटाया गया। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
NEET समेत परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ आंदोलन-यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि NEET समेत कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जंतर-मंतर पर लगातार धरना और प्रदर्शन जारी है। CJP ने कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
सरकार पर जिम्मेदारी डालते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान-अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर सोनम की तबीयत गंभीर हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए क्योंकि अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दिपके ने बताया कि सोनम ने साफ कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे। उन्होंने एक व्यंग्यात्मक कार्टून भी साझा किया, जिसमें परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष था।
लद्दाख वार्ता में प्रगति, शिक्षा पर भी मांगी जवाबदेही-सोनम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के मुद्दे पर उठाए गए कदम सकारात्मक हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था में भी जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है और सरकार को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।
लद्दाख वार्ता में आगे बढ़ी बातचीत, आंदोलन को मिला नया समर्थन-लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने बताया कि गृह मंत्रालय के साथ बैठक के मतभेद दूर हो गए हैं। अब प्रशासनिक ढांचे पर औपचारिक बातचीत का रास्ता साफ हो गया है। दोनों संगठनों ने कहा कि सोनम की भूख हड़ताल ने केंद्र और प्रतिनिधियों के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने में मदद की है।
छात्रों का अनशन जारी, नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन-जंतर-मंतर पर सोनम के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के छह छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं, जो 15वें दिन में पहुंच गई है। इस आंदोलन को कई राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों का समर्थन मिला है। इनमें वामपंथी नेता, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आरटीआई कार्यकर्ता और कई सांसद शामिल हैं। लगातार मिल रहे समर्थन से प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है और वे अपनी मांगों पर डटे हुए हैं।



