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प्रोजेक्ट चीता में करोड़ों के खर्च पर सवाल, मीट सप्लाई और खरीद प्रक्रिया को लेकर EOW में शिकायत

 

बिना टेंडर के खरीद और भुगतान में गड़बड़ी के आरोप-मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चल रहे प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता मोहम्मद चीनी कुरैशी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सितंबर 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों के लिए बकरा, पाड़ा और मीट बिना टेंडर प्रक्रिया के खरीदा गया। साथ ही अलग-अलग वर्षों में एक ही सप्लायर को अलग-अलग दरों पर भुगतान किया गया। शिकायत में कहा गया है कि सरकारी खरीद में पारदर्शिता जरूरी होती है, लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी हुई है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

90 किलो के बकरे का बिल, वजन को लेकर उठे सवाल-शिकायत में सबसे बड़ा सवाल बकरों के वजन को लेकर उठाया गया है। आरोप है कि कुछ बिलों में एक बकरे का वजन 90 किलो दिखाकर भुगतान किया गया, जबकि जानकारों के मुताबिक एक स्वस्थ बकरे का वजन सामान्यत: 25 से 30 किलो के बीच होता है। ऐसे में 90 किलो का वजन दिखाकर भुगतान करना संदिग्ध है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि रिकॉर्ड में दर्ज वजन वास्तविकता से मेल नहीं खाता, तो सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच जरूरी है। यह मामला गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अलग-अलग वर्षों में कीमतों में भारी अंतर, जांच की मांग-शिकायत में भुगतान की दरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वर्ष 2022 में बकरे की कीमत लगभग 700 रुपये प्रति किलो थी, जबकि 2024-25 में 699 रुपये, 2025-26 में 499 रुपये और 2026-27 में 421 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। वहीं बाजार में आज भी बकरे का मीट करीब 800 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इस भारी अंतर ने भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ा दी है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि इस मामले की जांच कर कीमतों और भुगतान की सच्चाई सामने लानी चाहिए।

मीट की गुणवत्ता और स्रोत को लेकर भी उठे सवाल-शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि इतनी कम कीमत पर चीतों को किस जानवर का मीट दिया गया। उन्होंने मांग की है कि जांच एजेंसी यह पता लगाए कि सप्लाई किया गया मीट असल में किस जानवर का था और क्या रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी सही है। इस मामले में अभी तक कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह सवाल परियोजना की विश्वसनीयता पर भी असर डाल सकता है।

कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए आरोप, जांच पर सबकी नजर-कांग्रेस नेताओं ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दौलतराम गुप्ता और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद चीनी कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन, संबंधित अधिकारियों और सप्लायर की भूमिका की जांच की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि अनियमितता पाई गई तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल यह मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के पास है और सबकी निगाहें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

 

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