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केजरीवाल की केंद्र को चेतावनी

 

केजरीवाल ने केंद्र सरकार को दिया बड़ा संदेश-आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को छात्रों के आंदोलन को लेकर कड़ा संदेश दिया है। सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि अगर सरकार युवाओं की आवाज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करती रही, तो उसे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। केजरीवाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब सरकारें शांतिपूर्ण आंदोलनों की अनदेखी करती हैं, तो जनता चुनाव में उसका जवाब देती है। उन्होंने युवाओं की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की।

2011 के अन्ना आंदोलन से लिया सबक-केजरीवाल ने 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण देते हुए बताया कि उस वक्त यूपीए सरकार ने शुरुआत में आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया था। बाद में बातचीत जरूर हुई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का गुस्सा 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सत्ता में आने का कारण बना। केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा सरकार को उस दौर से सबक लेना चाहिए और छात्रों के आंदोलन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सरकार पर संवाद से बचने का आरोप-केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सोनम वांगचुक से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है, जबकि जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से ही संभव है। केजरीवाल ने कहा कि सरकार युवाओं की बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज कर रही है, जबकि यही वर्ग देश का भविष्य है। इसलिए सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और संवाद करना चाहिए।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई-आम आदमी पार्टी प्रमुख ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में आई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। साथ ही केजरीवाल ने सुझाव दिया कि सोनम वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए क्योंकि वे छात्रों की समस्याओं को बेहतर समझते हैं और शिक्षा में सुधार ला सकते हैं।

सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील-केजरीवाल ने सोनम वांगचुक को देश की महत्वपूर्ण आवाज बताते हुए उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म कर दें क्योंकि उनकी सेहत लगातार खराब हो रही है। केजरीवाल ने भरोसा दिलाया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन की भावना को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन वांगचुक का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि वे आगे भी छात्रों की आवाज बुलंद कर सकें।

19वें दिन में पहुंचा आंदोलन, स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता-सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 19वें दिन में पहुंच गई है। यह आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों, सुधारों की मांग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा है। इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का समर्थन प्राप्त है। आयोजकों के मुताबिक, लंबे अनशन के दौरान वांगचुक का वजन करीब 9 किलो कम हो चुका है। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं और उनकी बिगड़ती हालत को लेकर चिंता जताई जा रही है।

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