
गरीब रथ एक्सप्रेस में महिला की मौत से उठे सवाल, यात्रियों ने मदद मांगी लेकिन ट्रेन नहीं रुकी, जांच की मांग तेज-दिल्ली जा रही गरीब रथ सुपरफास्ट एक्सप्रेस में एक महिला की मौत ने रेलवे की आपातकालीन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। सहयात्रियों ने रेलवे कर्मचारियों से ट्रेन को नजदीकी स्टेशन पर रोककर मेडिकल सहायता दिलाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। समय पर इलाज न मिलने से महिला ने ट्रेन में ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
यात्रा के दौरान बिगड़ी महिला की तबीयत, यात्रियों ने लगाई मदद की गुहार-12 जुलाई को मुंबई के बांद्रा टर्मिनस से दिल्ली सराय रोहिल्ला जा रही गरीब रथ सुपरफास्ट एक्सप्रेस में एक महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई। डिब्बे में मौजूद यात्रियों ने तुरंत ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) से संपर्क किया और कई बार ट्रेन को नजदीकी स्टेशन पर रोककर एंबुलेंस बुलाने की मांग की। लेकिन ट्रेन नहीं रुकी और महिला को समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल सकी। इसी बीच महिला की मौत ट्रेन के अंदर ही हो गई। यात्रियों का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिलती तो शायद यह हादसा टल सकता था।
18 वर्षीय बेटे को देर तक नहीं बताई गई मां की मौत-इस घटना का सबसे दुखद पहलू महिला का 18 वर्षीय बेटा है, जो अपनी मां के साथ यात्रा कर रहा था। शुरुआत में उसे यह नहीं बताया गया कि उसकी मां की मौत हो चुकी है, बल्कि कहा गया कि वह बेहोश है। वह काफी देर तक यही सोचता रहा कि मां को होश आ जाएगा। जब सच सामने आया तो वहां मौजूद कई यात्री भावुक हो गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि ऐसी संवेदनशील स्थिति में परिवार को सही समय पर और सही तरीके से जानकारी क्यों नहीं दी गई।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई जांच की मांग-सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में कुछ यात्री महिला की मदद करते दिख रहे हैं, जबकि दूसरे हिस्से में ट्रेन को ट्रैक के पास रुका हुआ देखा जा सकता है। कुछ लोग एक ढके हुए स्ट्रेचर या शव जैसी वस्तु लेकर जाते भी नजर आ रहे हैं। हालांकि वीडियो से पूरी घटना की पुष्टि नहीं होती, लेकिन इसके सामने आने के बाद लोगों ने रेलवे प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आपातकालीन स्थिति में रेलवे ने नियमों का पालन किया या नहीं।
रेलवे के नियम क्या कहते हैं मेडिकल इमरजेंसी में?-भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, अगर किसी यात्री की तबीयत गंभीर हो जाए तो तुरंत टीटीई या ट्रेन गार्ड को सूचित करना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में रेलवे कर्मचारी प्राथमिक उपचार देने, कंट्रोल रूम से संपर्क करने, अगले स्टेशन पर डॉक्टर या एंबुलेंस की व्यवस्था कराने और जरूरत पड़ने पर ट्रेन रोकने जैसे कदम उठा सकते हैं। रेलवे ने यह भी साफ किया है कि अलार्म चेन केवल वास्तविक आपातकालीन स्थिति में ही खींची जानी चाहिए। बिना वजह चेन खींचना कानूनन अपराध है और इसके लिए जुर्माना या जेल की सजा भी हो सकती है। अब सवाल यह है कि इस मामले में नियमों का पालन कैसे हुआ।
रेलवे की प्रतिक्रिया और जांच का इंतजार-इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर रेलवे की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद ऑनबोर्ड स्टाफ ने क्या कदम उठाए और क्या समय रहते इलाज उपलब्ध कराया जा सकता था। खबर लिखे जाने तक पश्चिम रेलवे और रेलवे बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। रेलवे के पास मेडिकल सहायता, कंट्रोल रूम से समन्वय और स्टेशनों पर इलाज की व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन इस घटना ने इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आधिकारिक जांच के बाद ही पता चलेगा कि कहीं लापरवाही हुई है या नहीं।



