25 साल बाद लौट आया टीवी का सोना दौर: फिर शुरू हुआ ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ का नया सफर

तुलसी वापस आईं, यादें ताज़ा हुईं!-क्योंकि सास भी कभी बहू थी के 25 साल बाद नए अध्याय की शुरुआत हो गई है और इस वापसी ने सभी को पुरानी यादों में ले जा दिया है। स्मृति ईरानी की वापसी ने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही रौनक भर दी है।
टाइम मशीन में सफर-पहला एपिसोड देखकर ऐसा लगा जैसे समय पर वापस चले गए हों। तुलसी और मिहिर की शादी की 38वीं सालगिरह से शुरू हुई कहानी ने पुरानी यादों को ताज़ा कर दिया। तुलसी अब शांति निकेतन की मुखिया हैं और शो की शुरुआत उनकी तुलसी के पौधे की पूजा से होती है, जो वाकई में बहुत ही खूबसूरत है। यह एपिसोड स्टार प्लस और जियो हॉटस्टार पर दिखाया गया।
दिलों में बसने वाली यादें-इस शो ने पहले भी परिवारों को एक साथ जोड़ा था और अब नई पीढ़ी भी इसे देखने के लिए उत्साहित है। सोशल मीडिया पर पुराने दर्शक अपनी यादें शेयर कर रहे हैं – बचपन की यादें, दादा-दादी के साथ बिताए पल… अमेठी में तो लोगों ने सामूहिक रूप से पहला एपिसोड देखा! #TulsiIsBack और #KyunkiSaasBhiKabhiBahuThi ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे।
नया अंदाज, पुरानी कहानी-शो में विरानी परिवार का भव्य शांति निकेतन और पारिवारिक रिश्तों की पेचीदगियां अब भी हैं। मिहिर का तुलसी को कार गिफ्ट करना वाकई में चौंकाने वाला था, लेकिन पार्टी के बीच नए विवादों के भी संकेत दिखाई दिए। इस बार कहानी में सोशल मीडिया और मॉडर्न पार्टियों जैसे नए तत्व भी शामिल किए गए हैं।
क्या फिर से मिलेगी वही सफलता?-‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ अपने समय का कल्ट शो था। करण जौहर की ‘कभी खुशी कभी गम’ से लेकर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ तक में इसके रेफरेंस मिलते हैं। हालांकि, दूसरे पुराने शोज के रीबूट उतने कामयाब नहीं रहे। अब देखना होगा कि तुलसी और विरानी परिवार का यह नया सफर दर्शकों के दिलों में उतनी ही जगह बना पाएगा जितनी पहले बनाई थी।



