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AI समिट के ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ पर गरमाई राजनीति: PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा, सहयोगियों ने भी जताई नाराजगी

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमाई: पीएम मोदी ने मेरठ में कांग्रेस पर किया हमला-उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म होता जा रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला। दिल्ली में हुए AI समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ और संसद में हंगामे को लेकर उन्होंने पार्टी को कठघरे में खड़ा किया।

मेरठ से पीएम मोदी का सख्त संदेश, कांग्रेस की आलोचना की-मेरठ में मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सहयोगी दलों ने दिल्ली में हुए ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ की आलोचना की, जिनका उन्होंने खुले तौर पर धन्यवाद किया। पीएम ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया।

संसद में सहयोगी दलों को बोलने का मौका नहीं देने का आरोप-पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि संसद में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों को बोलने का मौका नहीं देती। इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस के ही सहयोगी दलों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कांग्रेस की वजह से आवाज दब जाती है।

मीडिया को नसीहत, विपक्ष और कांग्रेस में फर्क समझने को कहा-पीएम मोदी ने मीडिया से अपील की कि वह कांग्रेस के व्यवहार को पूरे विपक्ष से जोड़कर न देखें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से कांग्रेस को फायदा होता है और बाकी विपक्षी दलों की छवि भी खराब होती है। उन्होंने बताया कि अब विपक्ष के अन्य दल कांग्रेस के इस रवैये को समझ चुके हैं।

सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं-उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सहयोगी दलों ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने AI समिट के दौरान हुई घटना की आलोचना की। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। इससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदलने के संकेत-राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह घटनाक्रम आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदल सकता है। पीएम मोदी के बयान और सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाओं से कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है। विपक्षी एकता पर भी सवाल उठे हैं, और अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद से कैसे निपटती है।

यह पूरा मामला यूपी की चुनावी राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है। कांग्रेस के लिए यह चुनौती है कि वह अपने सहयोगियों का भरोसा बनाए रखे और विपक्षी एकता को मजबूत बनाए। आने वाले समय में इस विवाद का असर चुनावी रणनीतियों पर साफ नजर आएगा।

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