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AI समिट में विरोध पड़ा भारी: यूथ कांग्रेस के 4 कार्यकर्ता 5 दिन की पुलिस हिरासत में, जानिए पूरा मामला

राजधानी में विरोध प्रदर्शन के बाद चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी: लोकतंत्र और विरोध के अधिकार पर नई बहस-दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत में भेजे जाने का मामला चर्चा में है। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोर्ट का फैसला: चारों कार्यकर्ताओं को पांच दिन की पुलिस हिरासत-दिल्ली की अदालत ने शनिवार को Indian Youth Congress के चार कार्यकर्ताओं को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। ये सभी कार्यकर्ता एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।

पुलिस की मांग मानी गई: गहन पूछताछ के लिए हिरासत जरूरी-न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने पुलिस की उस मांग को स्वीकार किया जिसमें आरोपियों से गहराई से पूछताछ के लिए पांच दिन की हिरासत मांगी गई थी। पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए यह जरूरी है।

गिरफ्तार कार्यकर्ता बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना से जुड़े हैं-गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में बिहार से कृष्णा हरि और कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिम्हा यादव शामिल हैं। विभिन्न राज्यों से होने की वजह से पुलिस जांच को और गंभीरता से ले रही है।

पुलिस का आरोप: आपत्तिजनक नारे और पीएम की तस्वीर वाली टी-शर्ट-पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान आरोपियों ने आपत्तिजनक नारे लगाए और नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक चित्र वाली टी-शर्ट पहनी थी। पुलिस का कहना है कि इससे माहौल बिगड़ सकता था और कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

मोबाइल फोन बरामदगी और साजिश की जांच जरूरी-पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों के मोबाइल फोन बरामद करना जरूरी है ताकि विरोध प्रदर्शन की योजना, फंडिंग और टी-शर्ट कहां से आई, इसका पता लगाया जा सके। यह जांच मामले की गंभीरता को दर्शाती है।

पुलिस से झड़प में तीन जवान घायल, जांच में नए तथ्य सामने आए-पुलिस के वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस को रोकने की कोशिश की गई, जिससे झड़प हुई और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और हर पहलू की गहन जांच कर रही है।

बचाव पक्ष का दावा: शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार-आरोपियों के वकील ने कहा कि सभी कार्यकर्ता राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध किया। उनका कहना है कि विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है और केवल विरोध के लिए गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

गिरफ्तारी पर उठे सवाल, लोकतंत्र और विरोध के अधिकार पर बहस तेज-बचाव पक्ष ने कहा कि अगर विरोध करना अपराध है तो संसद में विरोध करने वाले सांसदों को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस मामले ने विरोध के अधिकार, लोकतंत्र की गरिमा और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस को और तेज कर दिया है।

यह मामला लोकतंत्र के मूल अधिकारों और पुलिस कार्रवाई की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में इस पर न्यायिक और राजनीतिक स्तर पर और बहस होने की संभावना है।

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