अमेरिका का बड़ा फैसला: ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में मिली अस्थायी छूट

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच अमेरिका ने उठाया कदम-दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया है। उसने समुद्र में फंसे हुए ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियों को कुछ समय के लिए हटा दिया है ताकि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ाई जा सके और कीमतों को काबू में रखा जा सके।
140 मिलियन बैरल तेल जल्द बाजार में आएगा-अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इस फैसले के तहत करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। यह तेल पहले से ही समुद्र में ट्रांजिट में है, इसलिए नए तेल की खरीद या उत्पादन की अनुमति इस छूट में शामिल नहीं है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
तेल की कीमतों में तेजी के बीच लिया गया अस्थायी फैसला-ब्रेंट क्रूड की कीमत युद्ध शुरू होने से पहले करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 119 डॉलर तक पहुंच गई है। इस तेज बढ़ोतरी ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है। इसी को देखते हुए अमेरिका ने यह अस्थायी कदम उठाया है ताकि अचानक आई कीमतों की तेजी को रोका जा सके और बाजार में संतुलन बना रहे।
चीन पर सस्ते दामों पर ईरानी तेल खरीदने का आरोप-अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन फिलहाल सस्ते दामों पर ईरानी तेल जमा कर रहा है। इस वजह से अमेरिका ने इस तेल को ग्लोबल मार्केट में लाने का फैसला किया है ताकि सप्लाई बढ़े और ईरान की उस रणनीति को कमजोर किया जा सके, जिससे वह बाजार पर नियंत्रण करना चाहता है।
छूट सीमित समय के लिए, 19 अप्रैल तक लागू रहेगी-यह अस्थायी छूट शुक्रवार से लागू हो गई है और 19 अप्रैल तक जारी रहेगी। इसके बाद स्थिति का आकलन कर आगे का फैसला लिया जाएगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ मौजूदा संकट को संभालने के लिए है और इससे ईरान को नए व्यापार या उत्पादन का कोई फायदा नहीं मिलेगा।
ट्रंप का बयान: सैन्य अभियान धीरे-धीरे खत्म करने पर विचार-
\अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को धीरे-धीरे खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कोई सीजफायर योजना नहीं है। उनका मानना है कि युद्ध में बढ़त बनाए रखने के वक्त सीजफायर करना सही नहीं होगा, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले रखे गए हैं।
इस तरह अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण और अस्थायी कदम उठाया है, जो आने वाले समय में तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर डाल सकता है।



