रूस से तेल खरीदने वालों के लिए अमेरिका की बड़ी चेतावनी: 500% टैरिफ से बदल सकता है ग्लोबल एनर्जी गेम?

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि ऐसे देशों पर 500% तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन का मकसद रूस को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले देशों पर दबाव बनाकर युद्ध कोष को कमजोर करना है।
500% टैरिफ की धमकी और ट्रंप प्रशासन की रणनीति-स्कॉट बेसेन्ट ने साफ कहा है कि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों (IEPA) का इस्तेमाल कर बिना सीनेट की मंजूरी भी यह कदम उठा सकते हैं। इसका मकसद रूस की आय के सबसे बड़े स्रोत पर सीधा प्रहार करना है।
‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ और इसके पीछे की सोच-यह प्रस्ताव ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ के नाम से जाना जाता है, जिसे सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है। इसका उद्देश्य उन देशों को कड़ा आर्थिक दंड देना है, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर मास्को की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। व्हाइट हाउस का मानना है कि 500% टैरिफ एक सख्त और स्पष्ट संदेश होगा।
सीनेट की बहस और व्हाइट हाउस की तैयारी-हालांकि यह बिल अभी सीनेट में चर्चा के दौर से गुजर रहा है, ट्रंप प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि जरूरत पड़ी तो इसे बिना लंबी प्रक्रिया के भी लागू किया जा सकता है। अमेरिका इस मुद्दे पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता और चाहता है कि आर्थिक दबाव से रूस की युद्ध क्षमता जल्दी कमजोर हो।
अमेरिका की नजर में चीन सबसे बड़ा निशाना-वॉशिंगटन के मुताबिक, चीन इस वक्त रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और रूस को आर्थिक ऑक्सीजन दे रहा है। बेसेन्ट ने कहा कि 500% टैरिफ की धमकी का मुख्य लक्ष्य चीन है। अमेरिका का आरोप है कि चीन प्रतिबंधों को दरकिनार कर रूस के साथ व्यापार बढ़ा रहा है।
चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर-अगर अमेरिका 500% टैरिफ लागू करता है, तो इसका सीधा असर चीन की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट आधारित अर्थव्यवस्था पर होगा। भारी टैक्स से चीनी उत्पाद महंगे हो जाएंगे और वैश्विक बाजार में उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है। अमेरिका चाहता है कि चीन रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों पर दोबारा विचार करे।
भारत को लेकर अमेरिकी बयान ने बढ़ाई हलचल-स्कॉट बेसेन्ट ने दावा किया है कि अमेरिकी टैरिफ नीति और बदले व्यापारिक रुख के बाद भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है। उनका कहना है कि 25% टैरिफ की आशंका ने भारत को अपना रुख बदलने पर मजबूर किया है।
भारत का रूस से तेल खरीदने का पुराना रुख-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से काफी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदा था। यह भारत के लिए सुविधाजनक विकल्प था। लेकिन अब अमेरिका का दावा है कि उसकी सख्त नीति के चलते भारत ने रूसी तेल से दूरी बना ली है, जो रणनीतिक बदलाव का संकेत है।
भारत सरकार का सतर्क और संतुलित जवाब-भारत सरकार ने इस मामले पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने दोहराया कि भारत के ऊर्जा फैसले हमेशा राष्ट्रीय हित और जनता की जरूरतों के आधार पर होते हैं।
कूटनीति और ऊर्जा जरूरतों के बीच भारत का संतुलन-भारत फिलहाल अमेरिका के साथ कूटनीतिक रिश्तों और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वैश्विक दबाव है, तो दूसरी तरफ देश की आर्थिक जरूरतें। आने वाले समय में यह देखना होगा कि भारत इस बदलते वैश्विक ऊर्जा और व्यापार माहौल में क्या रणनीति अपनाता है।



