असम विधानसभा चुनाव 2026: कर्नाटक के दिग्गज नेताओं के साथ सियासी जंग तेज

असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों का सियासी माहौल अब पूरी तरह गरम हो चुका है। इस बार चुनाव प्रचार में सिर्फ स्थानीय नेता ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के बड़े नेता भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। खास बात यह है कि कर्नाटक के दो बड़े नेता अलग-अलग पार्टियों की तरफ से असम में चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। इस ब्लॉग में हम आपको इस चुनाव की खास बातें और नेताओं की रणनीतियों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
कांग्रेस ने दी डीके शिवकुमार को बड़ी जिम्मेदारी-कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव और संगठन कौशल से चुनावी रणनीति मजबूत होगी। हाल ही में असम दौरे पर शिवकुमार ने कहा कि राज्य में बदलाव की हवा चल रही है और कर्नाटक की तरह विकास मॉडल असम में भी लागू किया जा सकता है। कांग्रेस इस चुनाव में विकास को मुख्य मुद्दा बनाकर जीत की तैयारी कर रही है।
बीजेपी ने तेजस्वी सूर्या को बनाया चुनाव प्रचार का चेहरा-बीजेपी ने भी कम नहीं छोड़ा और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या को असम में पार्टी की ताकत बढ़ाने के लिए मैदान में उतारा है। हाल ही में गुवाहाटी में बीजेपी के युवा नेताओं की बैठक में तेजस्वी सूर्या ने हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की नीतियों का समर्थन किया। उन्होंने घुसपैठ के खिलाफ सरकार के अभियान को चुनावी मुद्दा बनाकर प्रचार तेज किया है।
असम की राजनीति: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर-असम की राजनीति में पिछले कई सालों में बड़ा बदलाव आया है। पहले कांग्रेस के नेतृत्व में तरुण गोगोई ने करीब 15 साल तक राज्य पर कब्जा किया था। लेकिन 2016 में बीजेपी ने पहली बार सत्ता हासिल की और सरबनंदा सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में हिमंता बिस्वा सरमा ने नेतृत्व संभाला। अब बीजेपी तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस ने गोरव गोगोई को विपक्ष का चेहरा बनाकर चुनौती पेश की है।
विकास और घुसपैठ: चुनाव की मुख्य लड़ाई-इस चुनाव में विकास और घुसपैठ के मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। कांग्रेस का दावा है कि अगर वे सत्ता में आएंगे तो कर्नाटक जैसा विकास मॉडल असम में लागू करेंगे। वहीं बीजेपी हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार की सुरक्षा और विकास नीतियों को जोर-शोर से प्रचारित कर रही है। तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर भी अवैध घुसपैठ के खिलाफ सरकार के कदमों को रेखांकित किया और कांग्रेस पर पड़ोसी देश से घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
चुनाव प्रचार में बढ़ेगी रैलियों और जनसभाओं की संख्या-असम में कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है और चुनाव नजदीक आते ही प्रचार तेज हो गया है। दोनों पार्टियां बड़े नेताओं को लेकर अलग-अलग इलाकों में रैलियां और जनसभाएं कर रही हैं। डीके शिवकुमार और तेजस्वी सूर्या भी कई जगहों पर जाकर मतदाताओं से सीधे संवाद करेंगे। अब देखना होगा कि इस चुनाव में कौन सी पार्टी की रणनीति और प्रचार ज्यादा असरदार साबित होती है।
असम विधानसभा चुनाव 2026 में कर्नाटक के इन दिग्गज नेताओं की भागीदारी ने सियासी रंगत को और भी दिलचस्प बना दिया है। विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टियां जोर दे रही हैं, जो इस चुनाव को बेहद प्रतिस्पर्धात्मक बना रहा है।



