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चंद्रपुर में बड़ा सियासी उलटफेर: शिवसेना (यूबीटी) के सहारे बीजेपी ने मेयर की कुर्सी जीती, कांग्रेस को झटका

कांग्रेस को हैरानी, शिवसेना (यूबीटी) का मिला साथ, बीजेपी ने मेयर की कुर्सी पर जमाया कब्जा- महाराष्ट्र की राजनीति में चंद्रपुर नगर निगम का मेयर चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ लेकर आया। आंकड़ों में कांग्रेस भले ही आगे थी, लेकिन स्थानीय शिवसेना (यूबीटी) के समर्थन से बीजेपी ने मेयर पद हासिल कर लिया। इस नतीजे ने कांग्रेस को हैरान कर दिया है और पार्टी का कहना है कि इसका असर राज्य की राजनीति पर जरूर दिखेगा।

सीटों के खेल में कांग्रेस आगे, पर मेयर चुनाव में सबको चौंकाया-चंद्रपुर नगर निगम में कुल 17 वार्ड और 66 सीटें हैं। कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को 23। शिवसेना (यूबीटी) के पास 6 सीटें थीं। बाकी सीटें छोटे दलों और निर्दलियों के पास गईं। आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस मजबूत दिख रही थी, पर अंत में बीजेपी ने बाजी मार ली।

कांग्रेस की अंदरूनी कलह बनी बीजेपी की जीत की वजह-कहा जा रहा है कि कांग्रेस की स्थानीय इकाई में चल रही अंदरूनी खींचतान ने बीजेपी को बड़ा मौका दिया। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धनोरकर के बीच अनबन की खबरें पहले से थीं। इसी का फायदा उठाकर बीजेपी ने रणनीति बनाई और समर्थन जुटा लिया।

सिर्फ एक वोट से जीती बीजेपी, शिवसेना (यूबीटी) का मिला साथ-बीजेपी की पार्षद संगीता खांडेकर ने शिवसेना (यूबीटी) के समर्थन से सिर्फ एक वोट के अंतर से मेयर का चुनाव जीत लिया। कांग्रेस और अन्य उम्मीदवार पीछे रह गए। शिवसेना (यूबीटी) के प्रशांत दानव उपमहापौर बने। इस नतीजे ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं।

पहले विरोध, फिर समर्थन: शिवसेना (यूबीटी) का बदला रुख क्यों?-चुनाव से पहले शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने साफ कहा था कि वे बीजेपी का समर्थन नहीं करेंगे। पर चंद्रपुर में स्थानीय शिवसेना इकाई ने अलग फैसला लिया। इकाई प्रमुख संदीप गिर्हे के मुताबिक, कांग्रेस ने मेयर पद साझा करने से इनकार कर दिया था, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।

सत्ता का बंटवारा तय, नई रणनीति से आगे-समझौते के तहत, बीजेपी पहले 15 महीने मेयर रहेगी, फिर शिवसेना (यूबीटी) यह पद संभालेगी। उपमहापौर का पद पूरे पांच साल शिवसेना (यूबीटी) के पास रहेगा। स्थायी समिति की कमान भी तय समय के हिसाब से बंटेगी। इससे लगता है कि स्थानीय स्तर पर नई सियासी समझ बनी है।

कांग्रेस का आरोप: राज्यभर में दिखेंगे इसके असर-प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महा विकास आघाड़ी और इंडिया गठबंधन के साथी होने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया। उन्होंने AIMIM पर भी तटस्थ रहकर बीजेपी को मदद करने का आरोप लगाया। कांग्रेस का मानना है कि चंद्रपुर के इस फैसले का असर पूरे राज्य में दिखेगा।

क्या यह सिर्फ स्थानीय मामला है या बड़ी रणनीति?-कांग्रेस का कहना है कि पार्टी में कोई फूट नहीं है और मतभेद सुलझा लिए गए हैं। लेकिन चंद्रपुर का नतीजा दिखाता है कि स्थानीय फैसले कभी-कभी बड़े राजनीतिक संकेत देते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है।

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