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सुप्रीम कोर्ट से एल्विश यादव को बड़ी राहत – सांप के ज़हर मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक

एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत!-सोशल मीडिया स्टार एल्विश यादव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राहत भरी खबर दी है। सांप के जहर से जुड़े मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। अब आगे क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

 हाई कोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई-एल्विश यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए निचली अदालत की कार्यवाही रोक दी है। यह फैसला एल्विश के लिए एक बड़ी जीत है और उनके फैंस भी खुश हैं। इसका मतलब है कि अब तक सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक निचली अदालत में कोई सुनवाई नहीं होगी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि अब आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।

 रेव पार्टियों और गंभीर आरोप-पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि कुछ कथित ‘रेव पार्टियों’ में सांप के जहर का इस्तेमाल किया जाता था। इन पार्टियों में विदेशी लोग भी शामिल थे। ये आरोप पिछले साल मार्च में एल्विश यादव की गिरफ्तारी का कारण बने। हालांकि, छापे में उनके पास से न तो कोई सांप मिला और न ही कोई नशीला पदार्थ। इसीलिए ये मामला शुरू से ही विवादों में रहा है और सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई।

 एल्विश यादव के वकील की दलील: सबूतों का अभाव-एल्विश यादव के वकील का कहना है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। न तो उनके पास से कोई सांप मिला और न ही कोई नशीला पदार्थ। पुलिस के पास कोई ऐसा प्रमाण भी नहीं है जो एल्विश और अन्य आरोपियों के बीच सीधा संबंध साबित करे। वकील ने यह भी कहा कि जिस शख्स ने FIR दर्ज कराई, वो अब जानवरों के कल्याण का अधिकारी नहीं है, फिर भी उसने खुद को अधिकारी बताकर शिकायत दर्ज कराई। वकील का मानना है कि ये मामला तथ्यों से ज़्यादा लोकप्रियता के चलते सुर्खियों में है।

 लोकप्रियता और मीडिया ट्रायल-एल्विश यादव की लोकप्रियता ने इस मामले को और भी ज़्यादा चर्चा में ला दिया। वह सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हैं और कई टीवी शोज़ में भी दिखाई दिए हैं। इस वजह से इस मामले को मीडिया में खूब जगह मिली और उनकी छवि पर भी असर पड़ा। उनके वकील का कहना है कि उनकी लोकप्रियता ने इस केस को ज़रूरत से ज़्यादा हाई-प्रोफाइल बना दिया। अब उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस मामले में तथ्यों और सबूतों के आधार पर सुनवाई होगी, न कि मीडिया ट्रायल के दबाव में।

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