पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत: एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ वाडिनार पोर्ट पहुंचा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। देश का दूसरा एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ मंगलवार को गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच गया। यह जहाज 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है और खास बात यह है कि इसने तनावपूर्ण Strait of Hormuz को पार किया। इससे पहले पहला जहाज ‘शिवालिक’ सोमवार को मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका था। लगातार दो जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से देश में गैस सप्लाई को लेकर बड़ी राहत मिली है।
वाडिनार पोर्ट पर एलपीजी ट्रांसफर की तैयारी शुरू-‘नंदा देवी’ के वाडिनार पोर्ट पहुंचते ही एलपीजी को दूसरी जहाज में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दींदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुषिल कुमार सिंह ने बताया कि इस जहाज में 46,500 मीट्रिक टन गैस लाई गई है, जिसे ‘डॉटर वेसल’ BW Birch में ट्रांसफर किया जाएगा। यह जहाज आगे देश के विभिन्न हिस्सों तक गैस सप्लाई पहुंचाएगा। पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हो रही है ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
पूर्वी तट तक पहुंचेगी गैस सप्लाई-ट्रांसफर के बाद ‘BW Birch’ जहाज तमिलनाडु के एन्नोर पोर्ट और पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट पर गैस उतारेगा। इससे पूर्वी भारत के कई राज्यों को फायदा होगा, जहां हाल के दिनों में गैस की कमी महसूस की जा रही थी। यह सप्लाई घरेलू और व्यावसायिक दोनों सेक्टरों को राहत देगी, खासकर होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों को।
तेज रफ्तार से होगा गैस ट्रांसफर, सुरक्षा पर खास ध्यान-अधिकारियों के मुताबिक, जहाज से जहाज में गैस ट्रांसफर करीब 1000 टन प्रति घंटे की रफ्तार से होगा। पूरे ऑपरेशन को पूरा होने में लगभग दो दिन लगेंगे। इस दौरान हर चरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि सुरक्षा और गति दोनों का संतुलन बना रहे। पोर्ट प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि प्रक्रिया बिना किसी बाधा के तय समय में पूरी हो।
मंत्रालय के निर्देश: एलपीजी जहाजों को मिले प्राथमिकता-पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवे मंत्रालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि आने वाले सभी एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता दी जाए। यह प्रक्रिया पहले भी वाडिनार में होती रही है, लेकिन इस बार हालात को देखते हुए इसे और तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही काम के दौरान सुरक्षा नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कई एजेंसियां मिलकर कर रही निगरानी–इस ऑपरेशन पर कई एजेंसियां मिलकर नजर रख रही हैं। ‘डॉटर वेसल’ के पहुंचते ही उसे ‘नंदा देवी’ के साथ खड़ा किया जाएगा और शिप-टू-शिप ट्रांसफर शुरू होगा। हर छोटे-बड़े पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि कोई तकनीकी या सुरक्षा समस्या न आए। इस समन्वित प्रक्रिया से देश में गैस सप्लाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है।
वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर-गुजरात सरकार के मंत्री जितु वाघानी ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद जहाजों का सुरक्षित पहुंचना भारत के मजबूत कूटनीतिक संबंधों का नतीजा है। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक नेताओं से बेहतर रिश्तों को दिया। Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरना आसान नहीं था क्योंकि वहां ईरान, इजरायल और अन्य देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
ऊर्जा सप्लाई पर असर और भारत की चुनौती-भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। पहले मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से बड़ी मात्रा में सप्लाई आती थी, लेकिन हालिया संघर्ष के कारण Strait of Hormuz पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत ने रूस जैसे देशों से तेल लेकर स्थिति संभाली है, लेकिन गैस और एलपीजी की सप्लाई पर दबाव अभी भी बना हुआ है।
खाड़ी क्षेत्र में 22 भारतीय जहाज मौजूद-अधिकारियों के अनुसार, इस समय 22 भारतीय झंडे वाले जहाज पश्चिमी फारस की खाड़ी में हैं, जिन पर 611 नाविक सवार हैं। सरकार इन जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है ताकि वे बिना किसी खतरे के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। कुल मिलाकर, ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ जैसे जहाजों का सुरक्षित पहुंचना देश के लिए बड़ी राहत की खबर है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत के लिए यह बड़ी राहत है कि एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ सुरक्षित पहुंच गए हैं। यह न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक ताकत और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की भी मिसाल है। आने वाले दिनों में इस सप्लाई से घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।



