चीन की सेना में बड़ा फेरबदल: शीर्ष जनरलों की विदाई से उठे कई सवाल

चीन की सेना में बड़ा Shakeup: दो शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बर्खास्तगी और इसके मायने
चीन के दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बर्खास्तगी ने मचाई हलचल- चीन के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में दो बड़े सैन्य अधिकारियों—झांग यौशिया और लियू झेनली—को उनके पदों से हटा दिया है। उनके खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन की जांच शुरू हो गई है। यह खबर न सिर्फ चीन में बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि ये दोनों अधिकारी सेना और राजनीति में काफी प्रभावशाली थे।
झांग यौशिया और लियू झेनली: कौन थे ये अधिकारी?- झांग यौशिया अक्टूबर 2022 से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सबसे वरिष्ठ जनरल थे और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पॉलिटब्यूरो के सैन्य सदस्य भी। वहीं, लियू झेनली PLA की ग्राउंड फोर्स के पूर्व कमांडर और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख थे। दोनों की जिम्मेदारी सेना की रणनीति और संचालन की थी।
वैश्विक प्रतिक्रिया: चीन की सेना में संकट की आशंका-चीन के बाहर इस कदम को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। बीबीसी ने इसे “संकट में फंसी सेना” बताया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने इसे “हैरान कर देने वाला शुद्धिकरण अभियान” कहा। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस फैसले के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग अकेले ही सेना के शीर्ष पर रह गए हैं।
चीन की राजनीति की गोपनीयता और समझने में कठिनाई-चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की आंतरिक राजनीति बेहद रहस्यमय होती है। पॉलिटब्यूरो के अंदर क्या चल रहा है, शी जिनपिंग के सहयोगियों के साथ उनके रिश्ते कैसे हैं, इसकी जानकारी बाहर कम ही मिलती है। इसलिए इन बर्खास्तगियों के पीछे के असली कारण समझना आसान नहीं है।
PLA और CCP का गहरा नाता-चीन की सेना सीधे कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में है। सेना, पार्टी और सरकार तीनों पर शी जिनपिंग का नियंत्रण है। वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अध्यक्ष, CCP के महासचिव और देश के राष्ट्रपति हैं। इसलिए हर बड़ा सैन्य फैसला उनके नेतृत्व से जुड़ा होता है।
सैन्य नेतृत्व में खालीपन और अस्थिरता की चर्चा-झांग और लियू के हटने के बाद सेना के शीर्ष नेतृत्व में खालीपन आ गया है। 2024 से अब तक सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के तीन और सदस्य भी पद छोड़ चुके हैं, जिनकी जगह अभी तक नहीं भरी गई। इससे सेना के ढांचे में अस्थिरता की बात हो रही है।
भ्रष्टाचार की समस्या और जांच का दायरा-चीनी सेना में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासकर हथियारों और तकनीक की खरीद में गड़बड़ियों की खबरें आई हैं। 2022 के बाद से करीब दो दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटाया गया या जांच के दायरे में लाया गया है।
शी जिनपिंग के करीबी थे झांग और लियू, फिर भी बर्खास्त-झांग और लियू को शी जिनपिंग का करीबी माना जाता था। झांग के पिता और शी के पिता के बीच पुराना संबंध था। इसलिए उनकी अचानक बर्खास्तगी ने सबको चौंका दिया, खासकर तब जब वे एक महीने पहले तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिख रहे थे।
अमेरिका को जानकारी देने का गंभीर आरोप-वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग पर चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की जानकारी अमेरिका को देने का आरोप है। इसके अलावा, उन पर रिश्वतखोरी और राजनीतिक गुट बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
चीन के इतिहास में ऐसे घटनाक्रम नए नहीं-चीन की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं के पतन के बाद आरोप लगना कोई नई बात नहीं है। पॉलिटब्यूरो के अंदर आंतरिक संघर्ष पहले भी सामने आए हैं। 1971 में PLA कमांडर लिन बियाओ की रहस्यमयी मौत इसका एक बड़ा उदाहरण है।
दो मुख्य वजहें: भ्रष्टाचार या जिम्मेदारी से बचाव-विश्लेषकों के मुताबिक, झांग और लियू को हटाने के पीछे दो वजहें हो सकती हैं—पहली, वे खुद भ्रष्टाचार में शामिल थे, और दूसरी, उनके कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी उन्हीं पर डाली गई।
भ्रष्टाचार से निपटने को लेकर मतभेद भी हो सकते हैं-शी जिनपिंग भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं। सेना और पार्टी के बीच भ्रष्टाचार से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद भी हो सकते हैं। शी ने भ्रष्टाचार को “बड़ी लड़ाई” बताया है और इसे रोकने के लिए दबाव बनाए रखने की बात कही है।
शी जिनपिंग की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा-झांग, लियू या अन्य किसी अधिकारी की बर्खास्तगी से शी जिनपिंग की व्यक्तिगत स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। यह कदम प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, न कि राजनीतिक चुनौती के तौर पर।
ताइवान पर असर की अटकलें और सेना की क्षमता-कुछ विश्लेषक मानते हैं कि नेतृत्व में बड़े बदलाव से शी जिनपिंग का सेना पर भरोसा थोड़ा कमजोर हो सकता है। इससे ताइवान पर संभावित कार्रवाई की संभावना कम हो सकती है। हालांकि, सेना की वास्तविक ताकत पर इसका असर अभी साफ नहीं है।
सेना में संस्कृति बदलाव के संकेत-इतने वरिष्ठ अधिकारियों को हटाना इस बात का संकेत है कि PLA में अब अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर बढ़ेगा। यह सांस्कृतिक बदलाव चीन की सैन्य ताकत को मजबूत या कमजोर करेगा, यह अभी कहना मुश्किल है।



