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मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार करूर जाएंगे सी. जोसेफ विजय, भगदड़ पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे

करूर से सी. जोसेफ विजय की पहली आधिकारिक यात्रा-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय अब पहली बार किसी जिले के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। उन्होंने करूर को चुना है, जो राजनीतिक और भावनात्मक दोनों दृष्टिकोण से खास माना जा रहा है। 10 जुलाई को होने वाले इस दौरे में वे सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और सितंबर 2025 की करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों से भी मिलेंगे। यह कदम उनके पुराने वादे को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

करूर का चुनाव खुद किया, पीड़ित परिवारों से दूसरी मुलाकात-ग्रामीण विकास मंत्री एन. आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री 10 जुलाई को करूर पहुंचेंगे। सूत्रों के मुताबिक, यह चुनाव उन्होंने खुद किया है। यह दूसरी बार होगा जब वे भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिवारों से मिलेंगे। अक्टूबर 2025 में उन्होंने चेन्नई के पास पीड़ितों से मुलाकात की थी। अब मुख्यमंत्री के रूप में वे उनके घर जाकर हालचाल जानेंगे और सीधे बातचीत करेंगे।

सरकारी कार्यक्रम के साथ निभाएंगे पुराना वादा-सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में मुख्यमंत्री एक सरकारी कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। साथ ही वे उन परिवारों से मिलेंगे जिन्होंने करूर भगदड़ में अपने प्रियजनों को खोया। जब उनकी पार्टी सत्ता में नहीं थी, तब उन्होंने वादा किया था कि सरकार बनने पर वे खुद करूर आकर उनसे मिलेंगे। अब मुख्यमंत्री के रूप में यह दौरा उसी वादे को पूरा करने की कोशिश माना जा रहा है।

करूर भगदड़ बनी राजनीति का बड़ा मुद्दा-सितंबर 2025 में करूर में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। विजय ने तत्कालीन डीएमके सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया था। उनके सहयोगियों ने भी तत्कालीन मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को दोषी बताया था। यह घटना उनकी राजनीतिक यात्रा का अहम मोड़ बनी।

CBI कर रही है मामले की जांच-करूर भगदड़ की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। मुख्यमंत्री विजय ने गवाह के तौर पर तीन बार बयान दर्ज कराया है। जांच अभी जारी है और एजेंसी घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का करूर दौरा इस संवेदनशील मामले के बीच और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री के बयान से बढ़ी सियासत-मुख्यमंत्री के दौरे से पहले राज्य की राजनीति फिर गरमाई है। उनकी सरकार के मंत्री आधव अर्जुना ने कहा कि करूर की घटना के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि करूर को लेकर कई राजनीतिक हिसाब बाकी हैं। इस बयान के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधना शुरू किया है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

विधायक विवाद के बीच अहम दौरा-मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब चेन्नई पुलिस ने आरोप लगाया है कि डीएमके नेता वी. सेंथिल बालाजी ने टीवीके के एक विधायक को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान समर्थन बदलने के लिए 35 करोड़ रुपये की पेशकश की। इस मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। ऐसे माहौल में करूर दौरा प्रशासनिक ही नहीं, राजनीतिक दृष्टि से भी खास माना जा रहा है।

 

 

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