पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘Bangla’ करने की मांग: पहचान, राजनीति और इतिहास की नई बहस

केरल के नाम बदलने से उठी ममता बनर्जी की आवाज-जब केंद्र सरकार ने केरल का नाम ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया तेज की, तो ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक कदम बताया। उनका कहना है कि बंगाल के नाम बदलने के प्रस्ताव को सालों से टाला जा रहा है, जबकि केरल को प्राथमिकता मिली। यह मुद्दा बंगाल की पहचान और राजनीति से जुड़ी बहस को फिर से गरमा रहा है।
‘Bangla’ नाम पर केंद्र सरकार की आपत्ति-पश्चिम बंगाल सरकार ने ‘Bangla’ नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन केंद्र ने इसे बांग्लादेश के नाम से मिलते-जुलते होने के कारण अस्वीकार किया। विदेश मंत्रालय ने भी इस पर चिंता जताई है कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम हो सकता है। नाम बदलने का फैसला केवल राज्य की इच्छा नहीं, बल्कि देश की कूटनीतिक छवि को भी ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
तीन भाषाओं में अलग-अलग नाम प्रस्ताव की वजह से अड़चन-2016 में बंगाल सरकार ने तीन भाषाओं में अलग-अलग नाम रखने का प्रस्ताव दिया था, जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया। केंद्र का तर्क था कि सभी भाषाओं में नाम एक जैसा होना चाहिए ताकि प्रशासनिक भ्रम न हो। इससे नाम बदलने की प्रक्रिया कई बार रुक गई और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया।
‘West Bengal’ नाम का ऐतिहासिक संदर्भ-‘West Bengal’ नाम ब्रिटिश काल के विभाजन से जुड़ा है। 1947 में देश के विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना और बाद में बांग्लादेश बना। भारत में बचा हिस्सा ‘West Bengal’ कहलाया। यह नाम सिर्फ प्रशासनिक पहचान नहीं, बल्कि इतिहास की एक महत्वपूर्ण निशानी है, जो विभाजन की याद दिलाता है।
ममता बनर्जी का ‘West’ शब्द हटाने का आग्रह-ममता बनर्जी का कहना है कि ‘East Bengal’ अब नहीं है, तो ‘West Bengal’ में ‘West’ शब्द का कोई मतलब नहीं। साथ ही ‘W’ अक्षर से नाम शुरू होने के कारण राज्य को आधिकारिक सूचियों में आखिरी स्थान मिलता है, जिससे कई बार प्रतिनिधियों और छात्रों को नुकसान होता है। उन्होंने कई बार इस मुद्दे को केंद्र के सामने उठाया है।
नाम बदलने की संवैधानिक और प्रशासनिक जटिलताएं-केंद्र सरकार के अनुसार, किसी राज्य का नाम बदलना आसान नहीं होता। इसके लिए संसद में विधेयक पास करना पड़ता है और कई सरकारी विभागों के रिकॉर्ड भी बदलने होते हैं। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें समय और संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए बंगाल का नाम बदलना अभी तक संभव नहीं हो पाया है।
केरल के फैसले से फिर तेज हुई बहस, लेकिन ‘Bangla’ बनने का सफर लंबा-केरल के नाम बदलने से बंगाल में बहस फिर शुरू हो गई है। ममता बनर्जी ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में बंगाल को ‘Bangla’ नाम जरूर मिलेगा। हालांकि इसमें संवैधानिक, राजनीतिक और कूटनीतिक कई बाधाएं हैं। यह मुद्दा सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि बंगाल की पहचान और इतिहास से जुड़ा है, इसलिए इसका समाधान अभी दूर है।
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का मुद्दा केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान से जुड़ा संवेदनशील विषय है। केरल के नाम बदलने के फैसले ने इस बहस को फिर से ताजा किया है, लेकिन ‘Bangla’ बनने का रास्ता अभी भी कई चुनौतियों से भरा है।



