बालाघाट में किसानों का प्रदर्शन, बैलगाड़ी रैली से सरकार को घेरा

महंगाई और किसानों की मांगों को लेकर बालाघाट में बड़ा प्रदर्शन: बैलगाड़ी रैली से सरकार को दी चेतावनी-मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर विरोध की लहर तेज हो गई है। वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक विवेक पटेल के नेतृत्व में किसानों ने एक विशाल बैलगाड़ी रैली और पैदल मार्च निकाला। इस आंदोलन के जरिए किसानों ने धान और गेहूं के समर्थन मूल्य में वृद्धि, खाद की कमी, और बढ़ती महंगाई जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। भारी संख्या में जुटे किसान और कार्यकर्ताओं ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी मांगों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैलगाड़ी रैली के जरिए किसानों ने जताया अनोखा विरोध-
आंदोलन की शुरुआत विधायक कार्यालय से हुई, जहां से किसान और समर्थक पैदल मार्च करते हुए निकले। विरोध को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए विधायक विवेक पटेल खुद बैलगाड़ी चलाते नजर आए। कई किसान अपने कंधों पर धान और गेहूं की बोरियां लेकर रैली में शामिल हुए, जो कृषि संकट की गंभीरता को दर्शाता है। यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जय स्तंभ चौक पहुंची, जहां एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। किसानों का कहना था कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
समर्थन मूल्य: 3100 रुपये धान और 2700 रुपये गेहूं की मांग-प्रदर्शन के दौरान किसानों की सबसे प्रमुख मांग फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी थी। किसानों ने मांग की कि धान का दाम 3100 रुपये और गेहूं का 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। किसानों का तर्क है कि बीज, खाद, डीजल और मजदूरी की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत काफी बढ़ गई है। यदि सरकार फसलों के सही दाम नहीं देगी, तो किसान कर्ज के जाल में फंस जाएंगे। उन्हें अपनी मेहनत का उचित फल मिलना ही चाहिए।
महंगाई और ईंधन की कीमतों पर सरकार को घेरा-धरने के दौरान केवल खेती ही नहीं, बल्कि आम आदमी से जुड़ी महंगाई पर भी तीखे प्रहार किए गए। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर रसोई के बजट और रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ रहा है। मध्यम और गरीब वर्ग के लिए जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा है।
खाद की किल्लत और सिंचाई की बदहाली पर उठाए सवाल-विधायक विवेक पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों को बुनियादी सुविधाएं देने में विफल रहा है। क्षेत्र में खाद की भारी कमी बनी हुई है, जिससे बुआई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, नहरों की सफाई न होने के कारण सिंचाई का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। बिजली कटौती और डीजल की अनुपलब्धता ने किसानों की कमर तोड़ दी है। विधायक ने कहा कि सरकार की घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जमीनी स्तर पर किसान आज भी परेशान है।
नगर पालिका में भ्रष्टाचार और व्यापारियों की समस्याएं-आंदोलन के दौरान स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका वारासिवनी की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त है और व्यापारियों से मनमानी वसूली की जा रही है। स्थानीय समस्याओं का समाधान न होने से नागरिकों में भारी असंतोष है। लोगों ने मांग की कि प्रशासन को पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए और जनता को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।
युवाओं का भविष्य: पेपर लीक और बेरोजगारी का मुद्दा-किसानों के इस मंच से युवाओं और छात्रों की आवाज भी बुलंद की गई। विधायक ने नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण युवाओं में हताशा बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए।



