ईद उल-अजहा 2025: एकता, मोहब्बत और इंसानियत का जश्न पूरे देश में

एकता और भाईचारे का त्योहार: बकरीद 2025-भारत में बकरीद का त्योहार हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। देश के कोने-कोने से खुशियों की तस्वीरें सामने आईं, जहाँ लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पावन त्योहार को मना रहे थे।
सुबह की नमाज़ और भाईचारा-7 जून की सुबह, जैसे ही सूरज की किरणें धरती पर पड़ीं, वैसे ही देश भर में ईद उल-अज़हा का त्योहार शुरू हो गया। छोटे-बड़े शहरों में लोग नए कपड़ों में सज-धज कर मस्जिदों में नमाज़ अदा करने पहुँचे। नमाज़ के बाद एक-दूसरे से गले मिलकर ‘ईद मुबारक’ कहना, प्यार और भाईचारे का अद्भुत नज़ारा था। यह सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं था, बल्कि एक ऐसा पल था जिसने इंसानियत, त्याग और एकता का एहसास कराया। हर उम्र और वर्ग के लोग इस पल को साथ मिलकर जी रहे थे।
नेताओं ने दी शुभकामनाएँ-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी देशवासियों को बकरीद की बधाई दी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि यह त्योहार सद्भाव को बढ़ावा दे और समाज में शांति की भावना को मज़बूत करे। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व त्याग, आस्था और आदर्शों का प्रतीक है। इन संदेशों ने त्योहार की खुशी को और बढ़ा दिया।
जामा मस्जिद में भारी भीड़-दिल्ली की जामा मस्जिद में नमाज़ के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। हज़ारों लोगों ने नमाज़ अदा की और एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे ताकि त्योहार शांति और सौहार्द के साथ मनाया जा सके।
देशभर में मनाई गई बकरीद-देश के अलग-अलग शहरों से ईद की खुशियों की तस्वीरें आईं। उत्तर प्रदेश के चंदौसी, बिहार के पटना, राजस्थान के जयपुर और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जैसे शहरों में लोगों ने मिलकर नमाज़ अदा की और खुशियाँ मनाईं। केरल के तिरुवनंतपुरम में भी बड़ी ही धूमधाम से ईद मनाई गई।
बकरीद का महत्व: कुर्बानी और साझेदारी-बकरीद, जिसे कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है, इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में मनाया जाता है। यह हज़रत इब्राहीम की कुर्बानी की याद दिलाता है। इस दिन मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं, जानवर की कुर्बानी करते हैं और उसका हिस्सा ग़रीबों में बाँटते हैं। यह त्योहार त्याग, दया और साझेदारी का प्रतीक है।
एकता का संदेश-7 जून की सुबह सिर्फ़ एक त्योहार की शुरुआत नहीं थी, बल्कि भारत की एकता और सौहार्द की मिसाल थी। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और जातियों के लोग मिलकर खुशियाँ मना रहे थे, जो इस देश की असली ताकत को दिखाता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि हमारे त्योहार सिर्फ़ रस्में नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली डोर हैं।



