नेतृत्व से नीति तक: सुशासन दिवस–2025 के अवसर पर अटल विचारों पर सार्थक संवाद

भोपाल : भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती के अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल द्वारा सुशासन दिवस–2025 का आयोजन पूर्व संध्या पर 24 दिसंबर को किया गया। इस अवसर पर “भारतीय संदर्भ में सुशासन” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. ए.पी. सिंह, सदस्य, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने भारतीय संदर्भ में सुशासन के संवैधानिक आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान ही सुशासन का ब्लू-प्रिंट है। उन्होंने कहा कि सुशासन का उद्देश्य केवल सत्ता का संचालन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों और लाभों की पहुँच सुनिश्चित करना है। मानव अधिकारों को उन्होंने सुशासन का एक महत्वपूर्ण आयाम बताया, जो संविधान की प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों में निहित है। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि सुशासन प्रभावी प्रशासन, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं का समन्वय है। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में ही सुशासन की अवधारणा अंतर्निहित है और सुशासन दिवस अटल जी के विचारों को आत्मसात कर प्रशासन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने का संकल्प लेने का अवसर है।
संस्थान के संचालक श्री ऋषि गर्ग ने अटल जी के सुशासन दर्शन, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं समावेशी विकास की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि सुशासन दिवस आत्ममंथन का अवसर है, जो प्रशासन और नीति-निर्माण को जनोन्मुख बनाने की प्रेरणा देता है। संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सुशासन के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार मिश्रा ने अटल जी के जीवन, नेतृत्व और सुशासन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुशासन की अवधारणा भारतीय परंपरा में निहित है, जिसे आज वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। उन्होंने अटल जी के नैतिक साहस, निर्णयन क्षमता, पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल विजय तथा संयुक्त राष्ट्र में हिंदी के प्रयोग जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को सुशासन के सशक्त उदाहरण बताया। डॉ. मिश्रा ने कहा कि अटल जी की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था—स्पष्ट नीति, स्पष्ट नीयत और पारदर्शी क्रियान्वयन ही उनके शासन की पहचान थी।
राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय की डॉ. सुषमा शर्मा ने सुशासन के कानूनी परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अटल जी की दृष्टि में शासन से अधिक सेवा का महत्व था, जहाँ नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता सुशासन की आधारशिला है। मध्यप्रदेश पुलिस की उपायुक्त (इंटेलिजेंस एवं सुरक्षा) सुश्री सोनाक्षी सक्सेना (आईपीएस) ने पुलिस व्यवस्था के संदर्भ में सुशासन की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा सुशासन की नींव हैं तथा नागरिकों में सुरक्षा का भाव स्थापित होना अत्यंत आवश्यक है। संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने रामराज्य की अवधारणा में सुशासन, अंत्योदय, पर्यावरण एवं प्रकृति का महत्व, नीति निर्माण एवं विश्लेषण में सुशासन तथा सांस्कृतिक परिदृश्य में सुशासन जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के वरिष्ठ सलाहकार एवं प्रमुख, मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र डॉ. मनोज कुमार जैन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।



