एस. जयशंकर की कूटनीतिक बैठकों से मजबूत होंगे वैश्विक रिश्ते

भारत की कूटनीति का जलवा: दुनिया से बढ़ रहे हैं रिश्ते!
मेक्सिको से दोस्ती का नया अध्याय-हमारे विदेश मंत्री, एस. जयशंकर, ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में मेक्सिको के विदेश सचिव, जुआन रेमन डे ला फुएंते, से मुलाकात की। इस अहम बातचीत में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मज़बूत करने के लिए एक नई योजना बनाने पर सहमति जताई। सोचिए, भारत और मेक्सिको मिलकर व्यापार, नई टेक्नोलॉजी और अपनी शानदार संस्कृति के आदान-प्रदान में नए रास्ते खोलेंगे। यह वाकई एक रोमांचक शुरुआत है!
साइप्रस के साथ सहयोग और शांति का संदेश-विदेश मंत्री जयशंकर की साइप्रस के विदेश मंत्री, कॉन्स्टैनटिनोस कॉम्बोस, के साथ हुई मुलाकात भी खास रही। प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच हुई प्रगति पर चर्चा हुई। यूरोप की मौजूदा स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत ने साइप्रस के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत स्थायी समाधान का समर्थन किया है। उम्मीद है कि कॉम्बोस जल्द ही भारत आएंगे, जिससे हमारी दोस्ती और गहरी होगी।
प्रशांत महासागर के द्वीपों से मज़बूत रिश्ते-‘फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन’ (FIPIC) की बैठक में जयशंकर ने मार्शल आइलैंड्स, तुवालु और पलाउ जैसे प्रशांत महासागर के कई छोटे द्वीप देशों के नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात की। भारत ने इन देशों के साथ मिलकर विकास के कामों और आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का वादा किया है। यह कदम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को और मज़बूत करेगा, जो सबके लिए फायदेमंद है।
सोलोमन आइलैंड्स और टोंगा के साथ नई साझेदारी की ओर-हमारे विदेश मंत्री ने सोलोमन आइलैंड्स के विदेश मंत्री, पीटर शनेल एगोवाका, और टोंगा के प्रधानमंत्री, डॉ. आइसेक वालु एके, से भी महत्वपूर्ण बातचीत की। इन मुलाकातों से यह साफ है कि भारत छोटे द्वीप देशों के साथ भी उतने ही गहरे रिश्ते बनाने पर ज़ोर दे रहा है, जितने बड़े देशों के साथ। भारत की यह सोच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को एक नई दिशा देगी, जो बहुत अच्छी बात है।



