ओडिशा कांग्रेस में बढ़ती नाराज़गी? भक्त चरण दास की लीडरशिप पर गंभीर सवाल

ओडिशा कांग्रेस में मोक़ीम की चिट्ठी ने बढ़ाई हलचल: क्या पार्टी में छिड़ा असंतोष?- ओडिशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद मोक़ीम ने हाल ही में सोनिया गांधी को एक चिट्ठी लिखकर प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। मोक़ीम का यह पत्र पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष को साफ दर्शाता है। उन्होंने दास की तीन चुनावों में हार और उनके राजनीतिक इतिहास को लेकर चिंता जताई है, जिससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में उलझन और निराशा बढ़ रही है।
‘कोशल राज्य’ की मांग से पार्टी में बढ़ा तनाव- मोक़ीम ने चिट्ठी में यह भी बताया कि प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास और उनके बेटे सागर द्वारा अलग ‘कोशल राज्य’ की मांग ने पार्टी के अंदर तनाव और बेचैनी बढ़ा दी है। कई कार्यकर्ता इसे कांग्रेस की आधिकारिक नीति के खिलाफ मानते हैं, जिससे संगठन में एकजुटता कमजोर हो रही है। मोक़ीम का मानना है कि इस मुद्दे ने पार्टी के भरोसे को काफी हद तक प्रभावित किया है।
उपचुनाव में मिली हार ने नेतृत्व पर उठाए सवाल- नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार ने भी पार्टी नेतृत्व की छवि को कमजोर किया है। यह सीट प्रदेश अध्यक्ष दास के संसदीय क्षेत्र में आती है, जहां कांग्रेस को 83,000 से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा। मोक़ीम ने लिखा कि जब नेता अपने ही क्षेत्र में भरोसा नहीं जगा पाते, तो कार्यकर्ताओं के मन में नेतृत्व की क्षमता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कार्यकर्ताओं में बढ़ती निराशा और संगठन में भ्रम- मोक़ीम ने चिट्ठी में यह भी कहा कि लगातार हार और नेतृत्व की अस्पष्ट रणनीति के कारण हजारों कार्यकर्ता हतोत्साहित और भ्रमित महसूस कर रहे हैं। जमीन पर काम करने वाले नेताओं को लगता है कि पार्टी की दिशा साफ नहीं है, जिससे संगठन में ऊर्जा और उत्साह कम हो गया है। यह स्थिति कांग्रेस के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
पसंद-नापसंद और गुटबाज़ी से बढ़ा असंतोष- मोक़ीम के अनुसार, पार्टी में कई ईमानदार नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि संगठन के भीतर पसंद-नापसंद, गुटबाज़ी और पहचान न मिलने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मोक़ीम ने नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे इस स्थिति को गंभीरता से लें ताकि पार्टी में फिर से भरोसा और ऊर्जा लौट सके।
जयदेव जेना ने विवाद को मामूली बताया- वहीं, पूर्व ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष जयदेव जेना ने इस मामले को बड़ा विवाद मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि पार्टी के किसी भी सदस्य को नेतृत्व को अपनी बात लिखने का अधिकार है और यह कोई असामान्य बात नहीं है। जेना ने कहा कि कांग्रेस में कोई टूट-फूट नहीं है और ऐसी चिट्ठियाँ संगठन को बेहतर समझने का हिस्सा हैं, इसलिए इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।



