अंबेडकर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार नहीं दे पाई जवाब

अंबेडकर अस्पताल: ऑपरेशन का इंतज़ार, और मरीज़ों की पीड़ा- छत्तीसगढ़ के अंबेडकर अस्पताल में मरीज़ों को ऑपरेशन के लिए 15-20 दिन तक इंतज़ार करना पड़ रहा है, ये बात सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के बाद हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से जवाब माँगा है।
गंभीर मरीज़ों की दुर्दशा- एक्सीडेंट, फ्रैक्चर, और कैंसर जैसे गंभीर मरीज़ भी ऑपरेशन के लिए लंबा इंतज़ार कर रहे हैं। कई बार तो ऑपरेशन थिएटर तक ले जाकर मरीज़ को बिना ऑपरेशन किए वापस भेज दिया जाता है। इससे मरीज़ों की जान को खतरा बढ़ रहा है। ये स्थिति बेहद चिंताजनक है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनकी स्थिति नाज़ुक है।
डॉक्टरों का रवैया और मरीज़ों की मजबूरी- परिजन बताते हैं कि डॉक्टर बिना जानकारी दिए मरीज़ को ऑपरेशन थिएटर से वापस भेज देते हैं और निजी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह देते हैं। आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग इस स्थिति में बेहद असहाय महसूस करते हैं और अस्पताल के गलियारों में ही इंतज़ार करते रहते हैं। ये एक गंभीर समस्या है जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
संसाधनों की कमी और बढ़ता विवाद- अस्पताल में 29 ऑपरेशन थिएटर हैं, लेकिन सर्जरी करने के लिए मुश्किल से 1 या 2 डॉक्टर ही मौजूद होते हैं। संसाधन और स्टाफ की कमी के कारण मरीज़ों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इस कमी के कारण अस्पताल में तनाव का माहौल बन रहा है और कई बार मरीजों के परिजनों और अस्पताल के स्टाफ के बीच झड़प भी हो जाती है।
हाई कोर्ट की सुनवाई और आगे का रास्ता- हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से जवाब माँगा था, लेकिन तय समय तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। अगली सुनवाई 10 जून को तय की गई है। उम्मीद है कि इस सुनवाई के बाद अस्पताल में मरीज़ों की समस्याओं का समाधान निकलेगा और उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा।



